आस्था

पाण्डु पिंडारा धाम: 5000+ साल का इतिहास- यहां पिंडदान से मिलता है पितरों को मोक्ष, श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने भी किया था

Pandu Pindara Dham Jind Pind Daan: पितृपक्ष के पावन पखवाड़े में देश भर के श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति और मुक्ति के लिए पिंडदान व तर्पण करते हैं. इसी क्रम में हरियाणा के जींद जिले में स्थित ऐतिहासिक ‘पाण्डु पिंडारा धाम’ पितृ कर्म के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत कालीन इस पावन तीर्थ पर श्राद्ध और पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और उनकी भटकती आत्माएं तृप्त होती हैं. पितृपक्ष और विशेषकर अमावस्या के दिन यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.

श्रीकृष्ण के निर्देश पर पांडवों ने किया था अनुष्ठान

स्थानीय पुरोहितों और आचार्यों के अनुसार, इस तीर्थ का संबंध सीधे महाभारत काल से है. महाभारत के भीषण नरसंहार के बाद पांडव अपने दिवंगत पूर्वजों और युद्ध में मारे गए सगे-संबंधियों की आत्मा की शांति के लिए व्याकुल थे. तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जींद के इस पावन स्थल पर जाकर बरगद के वृक्ष तले भगवान शिव का आह्वान करने और विधिवत पिंडदान करने का मार्ग दिखाया था. पांडवों द्वारा किए गए उसी अनुष्ठान के बाद से इस स्थल का नाम ‘पाण्डु पिंडारा’ पड़ा.

अमावस्या और पितृपक्ष में जुटता है आस्था का सैलाब

धाम में पितृ कर्म की यह परंपरा सदियों से निर्बाध चल रही है. विशेष रूप से सोमवती अमावस्या और सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर यहां दूर-दराज के राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पवित्र सरोवर में स्नान करने के बाद भगवान शिव का पूजन और जौ के आटे, काले तिल, दूध, दही, शहद, धागे के पत्ते और कमलगट्टे के बीजों से पिंडदान करने पर कुल के सभी पितृ दोषों से मुक्ति मिल जाती है.

मोक्ष प्राप्ति और पितरों के आशीर्वाद की कामना

यहां पहुंचे श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिव्य तीर्थ पर किया गया श्राद्ध कभी निष्फल नहीं जाता. भक्त पवित्र जल में आचमन व तिलांजलि देकर अपने ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के लिए प्रार्थना करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि पूर्वजों की प्रसन्नता से परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है, जिसके चलते पूरे पितृपक्ष में यहां मेले जैसा माहौल बना रहता है.

पितृपक्ष में यहां के 52 घाटों पर उमड़ते हैं श्रद्धालु, जानिए श्राद्ध और पिंडदान का महत्व – परमेश्वर श्रीराम ने भी पूरी की थी विधि

Vijay Ram

'भारत एक्सप्रेस' में चीफ सब एडिटर। न्‍यूज वेबसाइट पर एवरग्रीन स्‍टोरीज, क्रिएटिव/स्‍पेशल प्रजेंटेशन, हाइलाइट्स के अगुआ। संस्‍था के शुरुआती दौर से दिन-रात हर मौके पर दम-दिमाग झोंककर स्वयं को तपाया। अब तक 8,000 से ज्‍यादा पोस्ट्स पब्लिश कर चुके, 1K+ बाइलाइन हुईं। 'भारत एक्सप्रेस' के CMD एवं एडिटर-इन-चीफ उपेन्द्र राय जी के प्रोग्राम्स (कॉन्क्लेव), और आर्टिकल्‍स को Bharatexpress.com पर प्रमुखता से कवर करते हैं। जर्नलिज्‍म में इनके 10+ वर्ष बीते। यहां से पहले एबीपी इंटरनेशनल, वनइंडिया हिंदी, राजस्‍थान पत्रिका और भास्कर ग्रुप में सेवा दे चुके। देश-विदेश, सैन्य-रणनीति, स्पेस साइंस, ऑफबीट, धर्म-अध्यात्म की खबरों में रुचि।

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