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Pitru Paksha

Aaj Ka Panchang 5 October 2026: आज आश्विन कृष्ण दशमी श्राद्ध और पुष्य नक्षत्र का संयोग है. जानिए राहुकाल, शुभ मुहूर्त, भद्रा का समय और इंदिरा एकादशी व्रत आज है या 6 अक्टूबर को?

Pitru Paksha Panchang: 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और अष्टमी श्राद्ध का संयोग है. पंचांग के अनुसार इस दिन कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त और अपराह्न काल की विशेष स्थितियां रहेंगी, जो पितृ पक्ष के अनुष्ठानों, तर्पण और पिंडदान के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

Pitru Paksha Panchang: 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि (सुबह 10:15 बजे तक) के बाद सप्तमी तिथि का आरंभ हो रही है. इस दिन सप्तमी श्राद्ध भी है. जानें आज के पंचांग के उपाय.

Pitru Paksha Panchang: 1 अक्टूबर 2026, गुरुवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि और पंचमी श्राद्ध का संयोग है. पंचांग के अनुसार इस दिन रोहिणी नक्षत्र और सिद्धि योग के साथ-साथ राहुकाल की विशेष स्थितियां रहेंगी, जो पितृ पक्ष के अनुष्ठानों और धार्मिक कर्मों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

Aaj Ka Panchang: 30 सितंबर 2026 को पितृ पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 2:55 बजे तक रहेगी और इसके बाद पंचमी शुरू होगी.

Pitru Paksha Panchang: 30 सितंबर 2026, बुधवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और चतुर्थी श्राद्ध है. पंचांग के अनुसार इस दिन भरणी और कृत्तिका नक्षत्र के साथ-साथ अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल की विशेष स्थितियां रहेंगी, जो पितृ पक्ष के अनुष्ठानों और धार्मिक कर्मों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

Pitru Paksha Panchang: 29 सितंबर 2026 को पितृ पक्ष के अंतर्गत तृतीया श्राद्ध है. पंचांग के अनुसार जानें पितृ कर्मों के लिए बेहद महत्वपूर्ण समय.

Pitru Paksha Panchang: आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और द्वितीया श्राद्ध का संयोग है. पंचांग के अनुसार रेवती और अश्विनी नक्षत्र के साथ-साथ अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल की विशेष स्थितियां बन रही है.

Aaj Ka Panchang: 27 सितंबर 2026 से आश्विन माह की शुरुआत हो रही है और आज पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर प्रतिपदा श्राद्ध किया जाएगा. आज सर्वार्थ सिद्धि योग, अभिजीत मुहूर्त और शुभ चौघड़िया के साथ राहुकाल व पंचक का भी ध्यान रखना जरूरी है.

Lohargal Surya Kund Pitru Paksha Pind Daan: राजस्थान के लोहार्गल स्थित सूर्यकुंड में पितृपक्ष पर पिंडदान का विशेष महत्व है. महाभारत काल में पांडवों के शस्त्र यहीं गले थे और परशुराम जी ने भी तर्पण किया था.