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IND vs PAK T20 World Cup 2026: कहते हैं दोस्त वही जो मुसीबत में काम आए लेकिन क्रिकेट की दुनिया में पाकिस्तान ने इस कहावत को उल्टा कर दिया है. उसने साबित कर दिया है कि दोस्त वही जो मुसीबत में फंसाकर खुद कमाने निकल जाए. महज कुछ ही दिनों में पाकिस्तान, भारत के साथ कोलंबो में टी-20 वर्ल्ड कप मुकाबला खेलने को राजी हो गया है. उसने ड्रामा कर जो शर्तें रखीं थी उसमें से करीब-करीब सभी को ICC ने दरकिनार कर दिया है. अब सवाल यह उठता है कि कोई बात नहीं मानी गई फिर भी पाकिस्तान क्यों राजी हो गया?
आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी और टी-20 वर्ल्ड कप के इस पूरे ड्रामे का अंत ऐसा होगा इसकी उम्मीद शायद बांग्लादेश को भी नहीं थी. पाकिस्तान ने अपने ‘फायदों’ के लिए यू-टर्न मारा और बीच मझधार में बांग्लादेश की लंका लगवा दी. इसके पीछे का कारण है ICC की कमाई और उसका डिस्ट्रिब्यूशन मॉडल. आइये इसे समझते हैं.
बड़ी-बड़ी बातें, भारत से खेल का बॉयकॉट और दुनिया भर के उसूल… ये सब तब तक ही थे जब तक पाकिस्तान को अपना दाव उल्टा पड़ता नहीं लगा. जैसे ही PCB को अहसास हुआ कि अगर उन्होंने भारत से पंगा लिया तो आईसीसी से आने वाला करोड़ों का फंड रुक जाएगा, उनके सारे तेवर ठंडे पड़ गए.
आंकड़ों पर नजर डालें तो ICC की कमाई में बीसीसीआई के बाद इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का नंबर आता है. पाकिस्तान चौथा सबसे बड़ा हिस्सेदार है. उसे आईसीसी की कमाई का 5.75% यानी सालाना करीब 34.51 मिलियन डॉलर (लगभग 280-290 करोड़ रुपये) मिलते हैं. कंगाल होती अर्थव्यवस्था के बीच पीसीबी के लिए यह रकम ‘ऑक्सीजन’ से कम नहीं है. इसीलिए, जैसे ही आईसीसी ने आंखें दिखाईं, पाकिस्तान ने अपनी सारी शर्तें भूलकर खेलने के लिए हामी भर दी.
| रैंक | क्रिकेट बोर्ड | शेयर (%) | राशि ($ Million) |
| 1 | भारत (BCCI) | 38.50% | $231.00 M |
| 2 | इंग्लैंड (ECB) | 6.89% | $41.33 M |
| 3 | ऑस्ट्रेलिया (CA) | 6.25% | $37.53 M |
| 4 | पाकिस्तान (PCB) | 5.75% | $34.51 M |
| 5 | न्यूजीलैंड (NZC) | 4.73% | $28.24 M |
| 6 | वेस्ट इंडीज (CWI) | 4.52% | $27.12 M |
| 7 | श्रीलंका (SLC) | 4.52% | $27.12 M |
| 8 | बांग्लादेश (BCB) | 4.46% | $26.74 M |
| 9 | दक्षिण अफ्रीका (CSA) | 4.37% | $26.24 M |
| 10 | आयरलैंड (Cricket Ireland) | 3.01% | $18.04 M |
इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा तरस बांग्लादेश पर आता है. जिस लड़ाई को बांग्लादेश ने शायद पाकिस्तान के उकसावे या ‘भाईचारे’ के भरोसे शुरू किया था. उसका अंजाम उसे वर्ल्ड कप से बाहर होकर चुकाना पड़ा. मामला मुस्तफिजुर रहमान को IPL से निकालने से शुरू हुआ था. बांग्लादेश ने भारत में खेलने से मना किया, वेन्यू बदलने की मांग की और आईसीसी से भिड़ गया. 21 जनवरी तक अल्टीमेटम मिलने के बाद भी बांग्लादेश अपनी जिद पर अड़ा रहा. उसे लगा था कि पाकिस्तान उसका साथ देगा लेकिन 24 जनवरी को आईसीसी ने बांग्लादेश को बाहर कर स्कॉटलैंड को एंट्री दे दी.
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बांग्लादेश वर्ल्ड कप से बाहर हो गया, उसके खिलाड़ियों के सपने टूट गए, लेकिन उसका ‘बड़ा भाई’ पाकिस्तान अब चुपचाप भारत से खेलने को तैयार है. इसे कहते हैं अपने फायदे के लिए दोस्त की बलि चढ़ाना. लाहौर में हुई मीटिंग में पाकिस्तान ने आईसीसी के सामने शेर बनने की कोशिश की थी. उसने तीन बड़ी शर्तें रखी थीं. नतीजा ये हुआ कि आईसीसी ने एक भी शर्त नहीं मानी. बस कह दिया गया कि बांग्लादेश पर कोई ‘आर्थिक एक्शन’ नहीं लिया जाएगा. यानी, पाकिस्तान की न तो कमाई बढ़ी, न भारत झुका, बस अपनी इज्जत का फलूदा बनवाकर वे अब मैच खेलने को राजी हो गए हैं.
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