संसद में महिला आरक्षण बिल (131वां संशोधन) पास न हो पाने की चिंगारी अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कों तक पहुंच गई है. राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष और भाजपा नेता अपर्णा यादव ने शुक्रवार देर रात विधानभवन के सामने समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस का झंडा जलाकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया. इस घटना ने सूबे की सियासत का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. एक तरफ जहां अपर्णा यादव विपक्ष पर महिलाओं का हक मारने का आरोप लगा रही हैं, वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनके नेताओं ने इस प्रदर्शन को ‘ड्रामा’ बताते हुए कड़ा पलटवार किया है.
शुक्रवार रात अपर्णा यादव अपने समर्थकों के साथ विधानभवन के सामने पहुंचीं और उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के झंडे जलाकर जमकर नारेबाजी की. अपर्णा ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण का यह बिल वर्षों से लंबित है और केवल विपक्षी दलों की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह एक बार फिर से अटक गया है. राज्य महिला आयोग की सदस्यों ने इसके साथ ही सपा के प्रदेश कार्यालय पर भी प्रदर्शन किया और शनिवार को एक और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.
सपा मुख्यालय पर हुए इस प्रदर्शन को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर करारा तंज कसा है. उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में लगभग 12 करोड़ महिलाएं हैं. भाजपा वालों को अगर प्रदर्शन करना ही था, तो कम से कम 12 महिलाओं को तो प्रदर्शन के लिए भेजते.” अखिलेश का यह तंज प्रदर्शन में महिलाओं की कम संख्या और इसे भाजपा का प्रायोजित इवेंट बताने की ओर सीधा इशारा था.
अपर्णा यादव (जो स्वयं मुलायम सिंह यादव परिवार की छोटी बहू हैं) द्वारा सपा का झंडा और अखिलेश यादव की तस्वीर जलाए जाने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. गोप ने इसे लोकतंत्र का अपमान बताते हुए कहा, “विरोध करना सबका अधिकार है, लेकिन लाल झंडा गरीब, किसान और नौजवान के सम्मान का प्रतीक है. जिस झंडे ने आपको पहचान दी, उसे जलाना आपके स्तर को दर्शाता है. यह झंडा श्रद्धेय मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की विरासत है.” उन्होंने इस कृत्य के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
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इस सियासी बवाल के बीच उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भाजपा और अपर्णा यादव के प्रदर्शन का बचाव किया है. पाठक ने स्पष्ट रूप से कहा कि आजादी के बाद से अब तक आधी आबादी को उनका वाजिब हक नहीं मिल पाया है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि महिला आरक्षण की पहल की पूरा देश सराहना कर रहा है और अब संसद में इस ऐतिहासिक विधेयक का विरोध करने वालों को आने वाले समय में इसका भारी खमियाजा भुगतना पड़ेगा.
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