Women Reservation Bill: महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पेश हुआ लेकिन सरकार इसे पारित नहीं करा सकी. समर्थन में 298 वोट पड़े, विरोध में 230, जबकि कुल 528 सांसदों ने मतदान किया. दो तिहाई बहुमत यानी 352 वोट की आवश्यकता थी लेकिन सरकार 54 वोट से पीछे रह गई.
राजनीतिक संदेश और रणनीति
दो दिन की चर्चा के दौरान ही साफ हो गया था कि सरकार के पास पर्याप्त संख्या नहीं है. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषणों में संकेत दिए थे. वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे इस बिल को किसी भी कीमत पर पास नहीं होने देंगे.
वोटिंग के बाद हंगामा और प्रदर्शन
बिल गिरने के बाद स्पीकर ने घोषणा की और इसके बाद किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला. एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया. बीजेपी ने ऐलान किया कि 18 अप्रैल से विपक्षी नेताओं के घरों के बाहर प्रदर्शन होंगे.
अमित शाह का पलटवार
गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि 1972 में इंदिरा गांधी ने सीटें बढ़ाने के बाद परिसीमन रोक दिया था और 1976 में आपातकाल के दौरान इसे फ्रीज कर दिया. शाह ने विपक्ष पर अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण में बढ़ोतरी का विरोध करने का आरोप लगाया.
दक्षिण बनाम उत्तर का नैरेटिव
शाह ने स्पष्ट किया कि दक्षिणी राज्यों का भी संसद पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तरी राज्यों का. उन्होंने कांग्रेस पर महिलाओं और ओबीसी के अधिकारों का विरोध करने का आरोप लगाया और कहा कि मोदी सरकार में 40% मंत्री ओबीसी समुदाय से आते हैं.
राहुल गांधी का हमला
राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी जानती थी कि बिल पास नहीं होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर चुनावी नक्शा बदलना चाहती है. राहुल ने कहा कि विपक्ष ओबीसी का हक छीनने नहीं देगा. उन्होंने सरकार पर महिलाओं और ओबीसी को अधिकार न देने का आरोप लगाया.
संसद में तीखी बहस
राहुल गांधी के भाषण के दौरान सत्ता पक्ष ने कई बार आपत्ति जताई. उन्होंने एक जादूगर की कहानी सुनाकर सरकार पर निशाना साधा, जिस पर सत्ता पक्ष भड़क गया. किरेन रिजिजू और राजनाथ सिंह ने उनके शब्दों पर कड़ा ऐतराज जताया और माफी की मांग की.
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महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाया लेकिन इस पर सियासत और नैरेटिव की लड़ाई जारी है. सरकार और विपक्ष दोनों ने इसे चुनावी मुद्दा बना लिया है. बिल गिरा लेकिन महिलाओं के अधिकार और आरक्षण का सवाल अब भी राजनीति के केंद्र में है.
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-भारत एक्सप्रेस
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