Vishal Singh
UP News: यूपी के गोंडा जिले से खाकी को शर्मसार करने वाला एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां न्याय की उम्मीद में दर-दर भटक रहे एक पीड़ित की गुहार सुनकर देवीपाटन रेंज के डीआईजी अशोक कुमार शुक्ला का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया. जनसुनवाई के दौरान डीआईजी साहब ने सबके सामने तरबगंज थाने के एसएचओ को फोन मिलाकर ऐसी लताड़ लगाई कि पूरे महकमे में हड़कंप मच गया. उन्होंने साफ अल्टीमेटम दिया कि अगर दरोगा ने पीड़ित के ₹30,000 तुरंत वापस नहीं किए, तो निलंबन के लिए तैयार रहें. सोशल मीडिया पर अब इस पूरी बातचीत का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जो असल में बीते 9 जुलाई की घटना का बताया जा रहा है. आइए आपको बताते हैं कि आखिर पूरा माजरा क्या है.
दरअसल तरबगंज इलाके के मन्नीपुरवा गांव के रहने वाले किंग उपाध्याय पिछले कई महीनों से पुलिस के चक्कर काट रहे थे. हारकर वे 9 जुलाई को अपनी फरियाद लेकर सीधे डीआईजी दफ्तर पहुंच गए. पीड़ित ने डीआईजी अशोक कुमार शुक्ला को जो कहानी सुनाई, उसने पुलिसिंग पर बड़े सवाल खड़े कर दिए.
किंग ने बताया कि कुछ समय पहले उनके साथ मारपीट हुई थी और गाड़ी में तोड़फोड़ की गई थी. इस मामले में थाने के दरोगा ओम प्रकाश यादव ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में मजबूत चार्जशीट दाखिल करने के नाम पर ₹30,000 की घूस ली थी. लेकिन दरोगा जी का खेल देखिए पैसे जेब में रखने के बाद उन्होंने चार्जशीट लगाने के बजाय केस में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाकर मामला ही रफा-दफा कर दिया.
पीड़ित ने डीआईजी को बताया कि जब काम नहीं हुआ, तो वे पिछले एक महीने से दरोगा से अपने पैसे वापस मांग रहे थे. लेकिन दरोगा साहब ने न तो फोन उठाया और न ही कोई सीधा जवाब दिया. किंग ने सबूत के तौर पर अपने और दरोगा के बीच हुई व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट डीआईजी को दिखा दिए.
चैट में पीड़ित ने साफ-साफ लिखा था, “सर, आपने चार्जशीट के नाम पर 30 हजार रुपये लिए थे, लेकिन अंतिम रिपोर्ट लगा दी. अब मेरे पैसे वापस कर दो, एक महीने से आप मुझे सिर्फ टहला रहे हो.” दरोगा इन मैसेजेस को देखकर भी चुप रहे, जिससे डीआईजी को समझते देर नहीं लगी कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है.
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व्हाट्सएप पर रिश्वत के पुख्ता सबूत देखते ही डीआईजी अशोक कुमार शुक्ला गुस्से से लाल हो गए. उन्होंने बिना देर किए तुरंत तरबगंज के थाना प्रभारी (SHO) श्रीधर पाठक को फोन घुमाया और क्लास लगानी शुरू कर दी.
डीआईजी ने कड़क आवाज में कहा, “आपके थाने का दरोगा चार्जशीट के नाम पर 30 हजार ले लेता है और फिर फाइनल रिपोर्ट लगा देता है. आप वहां बैठकर क्या मक्खियां मार रहे हैं? थाने में करप्शन रोकना एसएचओ का काम है. इन लोगों ने हद मचा रखी है, विभाग का नाम खराब कर रहे हैं और पूरे जिले की नाक कटवा दी है.”
उन्होंने आगे सख्त लहजे में निर्देश दिया, “मुकदमे की मेरिट दोबारा चेक करिए. अगर चार्जशीट बनती है, तो चार्जशीट लगाइए. और हां, पीड़ित के 30 हजार रुपये तुरंत वापस कराइए, नहीं तो एक्शन लेने के लिए मैं खुद आऊंगा.” डीआईजी ने यह भी कहा कि अगर दरोगा बेकसूर होता तो वह पूछता कि किस पैसे की बात हो रही है, लेकिन उसका चुप रहना ही उसकी चोरी की गवाही दे रहा है.
पीड़ित किंग उपाध्याय के मुताबिक यह पूरा विवाद इसी साल 23 जनवरी 2026 को शुरू हुआ था. गांव के ही राजा नाम के एक शख्स ने उनकी कार का शीशा तोड़ दिया था और उनके साथ जमकर मारपीट की थी. किंग ने इसकी एफआईआर भी दर्ज कराई थी. फरवरी में दरोगा को पैसे देने के बाद भी जब चार महीने तक न्याय नहीं मिला तब जाकर उन्होंने डीआईजी की चौखट पर न्याय की गुहार लगाई. हालांकि पीड़ित का कहना है कि डीआईजी की इतनी सख्त फटकार के बावजूद अभी तक उनके पैसे उन्हें वापस नहीं मिले हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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