IAS Rinku Singh Rahi: भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी दिलेरी और जुझारूपन के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में प्रसिद्ध IAS रिंकू सिंह राही (IAS Rinku Singh Rahi) एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार चर्चा इसलिए क्योंकि उन्होंने धरना दे रहे वकीलों के सामने जाकर उठक-बैठक की. जिसके बाद से लोग लगातार पूछ रहे हैं आखिर एक IAS को वकीलों के सामने क्यों उठक-बैठक करना पड़ रहा है. तो चलिये बताते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है?
दरअसल कुछ दिनों पहले रिंकू सिंह राही का तबादला मथुरा से शाहजहांपुर में SDM के पद पर कर दिया गया. बात मंगलवार की है, जब नए नवेले SDM साहब रिंकू सिंह राही तहसील परिसर का निरीक्षण करने पहुंचे. इस दौरान उन्होंने 4 लोगों को खुले में पेशाब करते देख लिया. जिसके बाद उन्होंने चारों को उठक-बैठक लगाने की सजा दी.
एसडीएम के इस फैसले का वहां के वकीलों ने विरोध कर दिया और धरने पर बैठ गए. मामला बिगड़ते देख एसडीएम रिंकू सिंह खुद धरना स्थल पहुंचे और वकीलों के सामने उठक-बैठक लगाकर माफी मांगी. जिसके बाद माहौल शांत हो गया.
एसडीएम के उठक-बैठक के बाद वकीलों का विवाद तो शांत हो गया, लेकिन आम जनता लगातार पूछ रही थी कि आखिर इतने इमानदार अधिकारी को क्यों उठक-बैठक लगानी पड़ी.
इस पूरे मामले पर पुवायां के SDM रिंकू सिंह राही ने अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि वो तहसील कार्यालय का निरीक्षण करने जब पहुंचे तो देखा कि 4 लोग दीवार पर लघुशंका कर रहे थे. जिसके बाद मैंने उनसे उठक-बैठक लगवाई. जब मैं धरना दे रहे वकीलों के पास पहुंचा तो उन्होंने मुझे बताया कि यहां के शौचालय में भारी गंदगी है. इसकी सफाई की जिम्मेदारी आपकी है. तो क्या आप उठक-बैठक लगाएंगे या आम आदमी ही सिर्फ उठक-बैठक लगायेगा. जिसके बाद मैंने भी वहां उठक-बैठक लगा दी.
एसडीएम रिंकू सिंह राही के इस सरल व्यवहार की चारों तरफ तारीफ हो रही है. रिंकू सिंह आम आदमी के लिए जितने सरल हैं अपराधियों के लिए उतने ही कठोर हैं. आइये बताते हैं कि आखिर रिंकू सिंह कौन हैं?
पूरे उत्तर प्रदेश में रिंकू सिंह की पहचान भ्रष्टाचार के खिलाफ दिलेरी और बहादुरी से लड़ने वाले अधिकारी के तौर पर होती है. उनके जीवन की कहानी आज भी युवाओं को प्रेरित करती है. 20 मई 1982 को अलीगढ़ में जन्में रिंकू सिंह ने एनआईटी जमशेदपुर से मेटलर्जी में बीटेक किया है. उन्होंने गेट परीक्षा में पूरे भारत में 17वीं रैंक हासिल की थी. 2004 में उन्होंने प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा पास कर समाज कल्याण अधिकारी बने थे.
बात 2008 की है, उनकी तैनाती मुजफ्फरनगर में हुई थी. उन्होंने मुजफ्फरनगर में छात्रवृति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में लगभग 100 करोड़ रुपये के घोटाले को उजागर कर दिया था. जिसके बाद 2009 में उनपर एक जानलेवा हमला हुआ. उस समय वो बैडमिंटन खेल रहे थे. बदमाशों ने उनपर ताबड़तोड़ फायरिंग की. जिसमें उन्हें 6-7 गोलियां लगी. हालांकि उस हमले में वो बाल-बाल बच गए.
इस हमले में रिंकू सिंह राही बाल-बाल बच गए, लेकिन उनका जबड़ा क्षतिग्रस्त हो गया. इस हमले में उनकी एक आंख भी जख्मी हो गई. इस हमले में घायल रिंकू सिंह का कई दिनों तक इलाज चला. हमला होने के बाद भी रिंकू सिंह ने हार नहीं मानी. उन्होंने घोटाले में कई आरोपियों को अदालत में ले जाकर सजा सुनवाई. हालांकि कुछ इस मामले में बरी हो गए. साल 2022 में उन्होंने UPSC क्रैक कर आईएएस बन गए.
– भारत एक्सप्रेस
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