Swarna 5555 Om designs world record: काशी की 15 वर्षीय संस्कृत की छात्रा स्वर्णा ने अनोखी उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने सिर्फ एक साल में ‘ॐ’ के 5555 अलग-अलग डिजाइन बनाकर यूरेशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है. यह रिकॉर्ड दुनिया में पहली बार बना है. इस खास उपलब्धि के लिए स्वर्णा को यूरेशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से आधिकारिक मान्यता दी गई. उन्हें काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया.
गुरुकुल के आयोजक ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि स्वर्णा ने खुद उनसे कहा था कि वे ‘ॐ’ पर कुछ विशेष करना चाहती हैं. इसके बाद उन्होंने स्वर्णा को कुछ विजिटिंग कार्ड्स उपलब्ध करवाए थे. उन्होंने कहा, “स्वर्णा ने इन कार्ड्स पर ‘ॐ’ के विभिन्न डिजाइन बनाना शुरू किया था. करीब एक साल तक यह काम चलता रहा.
आयोजक ने कहा, “गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में काशी का नाम दर्ज करवाने में हम सफल रहे. हमारे गुरुकुल में बहुत सारी बच्चियां पढ़ती-लिखती हैं और बहुत सारे कार्य संस्कृत के साथ-साथ फील्ड में सक्ष्म हैं तो यहां पर बच्चों को कुछ न कुछ करवाया जाता है. उन्हीं में से एक बच्ची स्वर्णा ने रुचि दिखाई थी कि सर मैं ‘ॐ’ पर कुछ करना चाहती हूं तो मैंने उनको विजिटिंग कार्ड्स खरीदकर दिए और वह करीब एक साल से करती आ रही थी, लेकिन मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी कि वो भी इतनी तेजी से. फिर उसने मुझसे कहा था कि सर 5000 से ऊपर हो गया है तो मैं अब क्या करूं तो मैंने उससे कहा था कि शिवरात्रि आने वाला है आप 5,555 कर दो. तो हां, गुरुकुल में इस बार पहली बार इस तरह का अनुभव देखने को मिल रहा है. ये देखते हुए आगे भी बच्चे कुछ न कुछ करते रहेंगे.”
स्वर्णा ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए बताया कि उन्होंने हर ‘ॐ’ को अलग-अलग तरीके से बनाया है. इसमें अलग-अलग रंग, अलग शैलियां, अलग लेखन विधियां और अलग डिजाइन शामिल हैं. स्वर्णा ने कहा, “जिस तरह से मनुष्य दिखने में अलग-अलग होते हैं, लेकिन सब में एक ही आत्मा और एक ही चेतना होती है, वैसे ही इन 5,555 ‘ॐ’ में दिखने में भिन्नता है, लेकिन इनमें एक ही ऊर्जा, एक ही शक्ति, एक ही प्रकाश और एक ही एकाग्रता है. सब कुछ एक ही है.”
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उन्होंने इसको बनाने की प्रेरणा को लेकर कहा, “डॉ. जगदीश ने मुझे प्रेरित किया कि तुम करो. जब मैं खुद को बहुत अकेला महसूस करती थी, तब मेरी आचार्य जी ने बहुत साथ दिया और कहा कि तुम जारी रखो. मैं अपने सर और आचार्य जी को दिल से धन्यवाद देना चाहती हूं.”
स्वर्णा ने बताया कि उन्होंने यह कार्य पूरे एक साल किया है. उन्होंने पहले विजिटिंग कार्ड्स पर ‘ॐ’ बनाए, फिर उन्हें चार्ट पेपर पर चिपकाकर एक बड़ा संग्रह तैयार किया. उन्होंने बताया कि उनका नाम अब यूरेशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है.
-भारत एक्सप्रेस
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