उत्तर प्रदेश

मेरठ में फर्जी IAS निकला असली अधिकारी-परिवार के सबूतों ने पुलिस के दावे की हवा निकाली

मेरठ के नौचंदी थाना क्षेत्र की पुलिस ने जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया और फर्जी IAS बताया. अब पुलिस के इन दावों की हवा निकल गई. आरोपी के परिजनों ने असली अधिकारी होने के सबूत पेश किए और डॉक्यूमेंट्स भी दिखाए. आननफानन में आरोपी को पुलिस ने रिहा कर दिया.

मेरठ के नौचंदी थाने की पुलिस ने राहुल कौशिक नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि राहुल खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों को धमकाता था. कॉल करके कई बार अफसरों को भी झांसे में लेता था.

SP सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि राहुल कौशिक वर्तमान में किसी पद पर नहीं हैं. परिवार द्वारा दी गई जानकारी को भी जांच में शामिल करके कार्रवाई की जाएगी. परिवार ने कुछ फोटो दिखाए हैं. इनमें से एक फोटो तत्कालीन उपराष्ट्रपति के साथ स्पेशल फाउंडेशन कोर्स के दौरान की है.

ब्यूरो ऑफ पार्लियामेंट्री स्टडीज एंड ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट भी परिजनों ने दिखाया है. वहीं उस समय अखबार में जो खबर UPSC के रिजल्ट को लेकर छपी थी, उसकी कटिंग भी परिजनों ने दी है. मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है.

पुलिस के फर्जी IAS के दावे की आरोपी के परिजनों ने हवा निकाल दी. परिवार ने बताया कि राहुल कौशिक ने 2008 में UPSC परीक्षा पास की थी. उन्हें इंडियन पोस्टल सर्विस मिला था. उनकी 728वीं रैंक थी. इससे पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं.

2017-18 में धोखाधड़ी का गंभीर आरोप

बताया जा है कि UPSC में राहुल का चयन हुआ. गाजियाबाद के रफी अहमद किदवई राष्ट्रीय डाक अकादमी (RAKNPA) में 2 वर्ष की ट्रेनिंग हुई थी. राहुल को 2010 में पहली तैनाती दिल्ली में मिली. इसके बाद असम के गुवाहाटी और चेन्नई, तमिलनाडु में भी पोस्टेड रहे. राहुल कौशिक पर वर्ष 2017-18 में धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप लगा था. इसके बाद राहुल को पहले निलंबित किया गया और वर्ष 2019 में बर्खास्त कर दिया गया था.

हालांकि वह अभी भी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. यह मामला सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में विचाराधीन है. परिजनों के मुताबिक, अपनी नौकरी खोने की वजह से राहुल डिप्रेशन में रहते हैं.

कुछ पारिवारिक समस्या भी हैं, जिस वजह से मानसिक स्थिति प्रभावित हुई है. बुधवार को राहुल ने पुलिस के किसी बड़े अधिकारी को फोन मिला दिया था, जिसके बाद नोकझोंक के बाद राहुल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था.

परिजनों का कहना है कि मामूली कहासुनी को पुलिस ने मीडिया ब्रीफिंग करके तूल दे दिया. जब स्थानीय लोगों को ये बात पता चली तो सभी थाने गए और उसके बाद पुलिस ने इस पूरे मामले में जब साक्ष्य देखे तो राहुल कौशिक को परिजनों की सुपुर्दगी में घर भेज दिया.

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-भारत एक्सप्रेस

हरीश शर्मा

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