उत्तर प्रदेश

सहारनपुर में कत्लेआम हो रहा था और वो सैफई में नाच देख रहे थे! अखिलेश यादव पर क्यों हमलावर हुए ओपी राजभर

रिपोर्टर – के.के. राय


यूपी की राजनीति में अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर एक बार फिर अपने पुराने तेवर में नजर आए. गाजीपुर के मरदह इलाके में पहुंचे राजभर ने ना केवल जनता की समस्याएं सुनीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर भी जमकर निशाना साधा. उनके निशाने पर इस बार किसान और आशा वर्कर्स के मुद्दे थे, जिन्हें लेकर अखिलेश यादव लगातार सरकार को घेर रहे हैं.

सपा पर बरसे राजभर

अखिलेश यादव के हालिया बयानों पर पलटवार करते हुए राजभर ने अतीत की याद दिलाई. उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि जब यूपी के सहारनपुर में कत्लेआम मचा हुआ था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री सैफई में महोत्सव के जश्न और नाच-गाने में व्यस्त थे. राजभर का सीधा इशारा सपा सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति की ओर था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज जो लोग किसानों के हमदर्द बन रहे हैं, उनके दौर में प्रदेश दंगों और कर्फ्यू की आग में झुलस रहा था.

किसानों को मिल रहा तीन गुना दाम

किसानों की बदहाली के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री राजभर ने दावा किया कि योगी सरकार में किसानों को सपा शासन की तुलना में तीन गुना ज्यादा भुगतान मिल रहा है. उन्होंने कहा, “अब बिचौलियों का राज खत्म हो चुका है. पहले जो पैसा दलालों की जेब में जाता था, अब वो सीधे लाभार्थी के बैंक खाते (DBT) में पहुंच रहा है. यही वजह है कि जिन लोगों की ‘लूट की दुकान’ बंद हो गई है, उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ हो रही है.”

आशा वर्कर्स के मुद्दे पर भी राजभर ने अखिलेश यादव को आईना दिखाने की कोशिश की. उन्होंने सवाल उठाया कि अखिलेश यादव खुद पांच साल तक मुख्यमंत्री रहे, तब उन्होंने इन वर्कर्स के लिए क्या किया? राजभर ने एक मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए कहा, “फलदार पेड़ पर ही पत्थर मारे जाते हैं, सूखे पेड़ पर कोई नहीं मारता.” उनका मतलब साफ था कि सरकार काम कर रही है, इसीलिए विपक्ष को मिर्ची लग रही है.

गाजीपुर में सुनी जनसमस्याएं

सियासी बयानबाजी के अलावा राजभर यहां पूरी तरह ‘एक्शन मोड’ में दिखे. उन्होंने कासिमाबाद तहसील के अधिकारियों के साथ बैठकर जनसुनवाई की. इस दौरान उन्होंने साफ हिदायत दी कि जनता के कामों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. राजभर का यह दौरा स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने और विपक्ष के आरोपों की हवा निकालने की एक सोची-समझी कोशिश मानी जा रही है.

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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