अयोध्या (Ayodhya) में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (Ram Mandir) दान चोरी का विवाद अब एक ज्वालामुखी का रूप ले चुका है. आम आदमी पार्टी के संजय सिंह के बाद अब राम मंदिर आंदोलन के बड़े चेहरे और धर्मसेना प्रमुख संतोष दुबे (Santosh Dubey) ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने एसआईटी (SIT) को 75 पन्नों का एक ऐसा ‘विस्फोटक’ डोजियर सौंपा है, जिसने रामलला के दरबार से लेकर लखनऊ तक भारी हड़कंप मचा दिया है.
संतोष दुबे ने एसआईटी (CO सिटी श्रेयस त्रिपाठी के माध्यम से) को जो सबूत सौंपे हैं, उनमें चंपत राय पर बेहद गंभीर और रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप हैं. दस्तावेजों में दावा किया गया है कि राजस्थान के बंसीपहाड़पुर के खदान मालिक दिलीप राठौर मंदिर के लिए मुफ्त पत्थर देने को तैयार थे, लेकिन कमीशनखोरी के चलते उस पेशकश को ठुकरा कर ट्रस्ट ने 5 गुना ज्यादा कीमत पर पत्थर खरीदे. दस्तावेजों में दीनानाथ वर्मा द्वारा लगाए गए 40% कमीशन के आरोपों का भी जिक्र है. इसके अलावा खरीदी गई जमीनों और मंदिर की मूर्तियों के गायब होने के रिकॉर्ड भी SIT को दिए गए हैं.
संतोष दुबे ने एसआईटी को सौंपे कागजातों में जमीन घोटाले की पूरी पोल खोल दी है. ग्राम कोट रामचन्दर में एसडीएम के यहां विवादित और 3 करोड़ की मालियत वाली जमीन को ट्रस्ट ने 23 करोड़ में खरीदा. ग्राम सहनेवाजपुर मांझा में जिस जमीन की कीमत महज 9 करोड़ थी, उसे ट्रस्ट के पैसों का दुरुपयोग करके 55 करोड़ में खरीदा गया. इसके अलावा राम निवास मंदिर पर भी नियम विरुद्ध कब्जा करने का आरोप लगाया गया है.
संतोष दुबे ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि ट्रस्ट ने खुद को बचाने के लिए सिर्फ ‘छोटे चोरों’ पर एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन बड़ों पर आंच नहीं आने दी. उन्होंने साफ कहा- “चंपत राय खुद को बचा नहीं सकते. अगर पुलिस ने हमारी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की, तो हम सीधे कोर्ट के जरिए एफआईआर दर्ज कराएंगे. अब चोर जेल जाने वाले हैं.”
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लगातार उठ रहे सवालों के बीच संतोष दुबे ने सीधे पीएमओ (PMO) तक शिकायत भेजी है. उन्होंने मांग की है कि इस भ्रष्ट ट्रस्ट को तुरंत भंग किया जाए. उनके मुताबिक, राम मंदिर आंदोलन में जान गंवाने वाले शहीद कारसेवकों के परिजनों को नए ट्रस्ट में जगह मिलनी चाहिए. साथ ही, चूंकि भगवान राम सूर्यवंशी हैं, इसलिए ट्रस्ट में कम से कम एक सूर्यवंशी क्षत्रिय प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाना चाहिए. अब देखना है कि SIT की इस ताबड़तोड़ जांच में अगला ‘शिकार’ कौन बनता है.
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