Ram Mandir Donation SIT Report: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे के वित्तीय प्रबंधन में कथित हेराफेरी (चोरी) के मामले ने अब भारी तूल पकड़ लिया है. इस बेहद संवेदनशील (Ram Mandir Donation SIT Report) और हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी 150 पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंप दी है.
लखनऊ मंडल के आयुक्त और SIT अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने गृह विभाग के मुखिया को यह रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद राम मंदिर में बड़े प्रशासनिक फेरबदल और एफआईआर (FIR) दर्ज होने की हलचल तेज हो गई है. इस बड़ी कार्रवाई के बीच हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर कौन हैं आईएएस संजय प्रसाद, जिनके हाथ में सरकार ने इस पूरे मामले की कमान सौंपी है?
संजय प्रसाद 1995 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के बेहद कड़क और प्रभावशाली आईएएस (IAS) अधिकारी हैं. जिनको जून 2026 में ही उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें प्रमोट कर अपर मुख्य सचिव (ACS) का रैंक दिया है. संजय प्रसाद को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सबसे करीबी और भरोसेमंद नौकरशाह माना जाता है. उनकी कार्यशैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके पास गृह विभाग जैसी महा-महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के साथ-साथ मुख्यमंत्री कार्यालय (ACS to CM) और सूचना विभाग का भी जिम्मा है.
बता दें कि संजय प्रसाद और सीएम योगी का नाता बेहद पुराना है वह साल 1999 से 2001 के बीच गोरखपुर में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के पद पर तैनात थे, तभी से उनकी प्रशासनिक क्षमता और ईमानदारी के मुख्यमंत्री मुरीद हैं. यही वजह है कि राम मंदिर जैसे आस्था से जुड़े संवेदनशील मामले में जब कड़े और निष्पक्ष फैसले की घड़ी आई, तो कमान संजय प्रसाद के हाथों में दी गई.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी इस शुरुआती रिपोर्ट में मंदिर के चंदे की गिनती और उसकी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मामले में अभी किसी को ‘क्लीन चिट’ नहीं मिली है.
FIR दर्ज करने की सिफारिश: सूत्रों का दावा है कि एसआईटी ने चंदे में हेराफेरी करने वाले कुछ गणना कर्मियों और संदिग्धों के खिलाफ तत्काल मुकदमा (FIR) दर्ज करने को कहा है.
CEO की तैनाती: रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि राम मंदिर की आंतरिक व्यवस्था के लिए किसी वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को मंदिर का ‘सीईओ’ (CEO) नियुक्त किया जाए, जिसकी देखरेख में सारा वित्तीय काम हो.
ट्रस्ट का पुनर्गठन: एसआईटी ने मंदिर के आंतरिक पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए ट्रस्ट के पुनर्गठन (बदलाव) का बड़ा सुझाव दिया है.
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले (Ram Mandir Donation) में अब तक राम शंकर उर्फ टिन्नू यादव और गोपाल राव समेत 11 से ज्यादा लोगों से गहन पूछताछ हो चुकी है. चूंकि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और देश के सबसे बड़े मंदिर से जुड़ा है, इसलिए संजय प्रसाद को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद राज्य सरकार इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को भेजने की तैयारी में है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की हरी झंडी मिलते ही अयोध्या राम मंदिर में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी और दोषियों पर सीधे पुलिसिया हंटर चलना तय माना जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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