Lucknow Coaching Centre Fire Full update
Lucknow Coaching Centre Fire: सोमवार (22 जून) का दिन लखनऊ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक दर्दनाक त्रासदी बन गया. अलीगंज इलाके में दोपहर करीब 3 बजे एक इमारत में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते 15 लोगों की जिंदगी छीन ली. इमारत के भीतर फंसे लोग मदद के लिए चीखते रहे, लेकिन धुएं और आग की लपटों ने उनकी सांसों को हमेशा के लिए थाम दिया. इस हादसे के बाद सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इन अनमोल जिंदगियों की कीमत महज कुछ लाख रुपये है?
इस दर्दनाक हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर आग इतनी भयावह कैसे हो गई? क्या इमारत में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे? क्या प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी ने इस त्रासदी को जन्म दिया? और सबसे बड़ा सवाल, इन 15 मौतों का जिम्मेदार कौन है? इस रिपोर्ट में हम जानेंगे उस भयावह दोपहर की पूरी कहानी, जिसने कई परिवारों के चिराग हमेशा के लिए बुझा दिए.
सिस्टम की लापरवाही या मालिक की लालच?
लखनऊ के अलीगंज में हुई भीषण आग की घटना के बाद कई बड़ी लापरवाहियां सामने आई हैं. जिस इमारत में आग लगी, वह मूल रूप से रहने के लिए बनाई गई थी, लेकिन वर्ष 2014 में इसे नियमों का पूरी तरह पालन किए बिना व्यावसायिक परिसर के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा. हैरानी की बात यह है कि नगर निगम के रिकॉर्ड में यह आज भी आवासीय भवन के रूप में दर्ज है (lucknow coaching centre fire who is responsible).
जांच में यह भी सामने आया कि भवन मालिकों ने फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं लिया था और नियमों की खामियों का फायदा उठाकर लंबे समय तक कार्रवाई से बचते रहे. इमारत में सुरक्षित निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. आग लगने के दौरान अंदर मौजूद बच्चे जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपते रहे और बाहर निकलने की कोशिश करते रहे, लेकिन आग ने मुख्य रास्ते को भी अपनी चपेट में ले लिया.
घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. साथ ही छह नामजद लोगों समेत अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. हालांकि, इस कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्षों से मौजूद अनियमितताओं और सुरक्षा खामियों पर प्रशासन की नजर पहले क्यों नहीं पड़ी. जिन परिवारों ने इस हादसे में अपने बच्चों को खोया है, उनके लिए जवाबदेही और न्याय की मांग अब सबसे अहम मुद्दा बन गई है.
मदद की गुहार लगाते रहे छात्र
इस भीषण आग की घटना ने कुछ ही मिनटों में सामान्य हादसे को बड़ी त्रासदी में बदल दिया. आग लगने के बाद पूरी बिल्डिंग में तेजी से धुआं भर गया और अंदर मौजूद छात्र, कर्मचारी और अन्य लोग मदद के लिए पुकारने लगे. कई लोग खिड़कियों और पाइपों के सहारे बाहर निकलने की कोशिश करते दिखे, जबकि कुछ छात्रों ने बचने की उम्मीद में खुद को बाथरूम में बंद कर लिया. हालात इतने खराब हो गए कि एक युवक ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिल से छलांग लगा दी और गंभीर रूप से घायल हो गया. मौके पर पहुंची दमकल और रेस्क्यू टीम ने लोगों को निकालने की कोशिश की, लेकिन घने धुएं और आग ने राहत कार्य को बेहद मुश्किल बना दिया.
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बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर कोचिंग सेंटर और एनिमेशन स्टूडियो चल रहा था, जहां गर्मी की छुट्टियों में कई छात्र क्लास लेने आए हुए थे. आग की खबर मिलते ही परिजन मौके पर पहुंच गए और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बिलखते रहे. कई परिवार घंटों तक अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार करते रहे. जैसे-जैसे रेस्क्यू आगे बढ़ा, अंदर से शव मिलने शुरू हो गए और माहौल गमगीन हो गया. अधिकारियों ने अतिरिक्त एम्बुलेंस और स्ट्रेचर मंगवाए, लेकिन तब तक यह साफ हो चुका था कि हादसा बेहद गंभीर है. एक के बाद एक शव बाहर आने लगे और अपनों का इंतजार कर रहे परिवारों का दुख और बेबसी पूरे इलाके में दिखाई देने लगी.
AC में शॉर्ट सर्किट होने की वजह से लगई आग
जांच में सामने आया है कि लखनऊ के अलीगंज में लगी भीषण आग की वजह सेंट्रल एसी सिस्टम (AC) की डक्ट या पेट शॉप के गोदाम में हुआ शॉर्ट सर्किट है (How the Lucknow coaching centre caught fire). यह हादसा उषा मेहता मार्ग स्थित तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में दोपहर करीब 3 बजे हुआ. आग तेजी से पूरी इमारत में फैल गई, जिससे वहां मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका. इस दुखद घटना में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें बड़ी संख्या छात्रों की थी.
-भारत एक्सप्रेस
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