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बलिदान दिवस विशेष: श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचार, पीएम मोदी का संकल्प; एक सूत्र से कैसे हो रहा भारत का विकास?

कहते हैं कुछ सपने वक्त की धूल में दब जाते हैं, लेकिन कुछ विचार ऐसे होते हैं जो सारी बाधाओं को तोड़कर हकीकत बन जाते हैं. भारत की आजादी भी कुछ ऐसी ही कहानी है जो खून, पसीने और बलिदान से लिखी गई है. 15 अगस्त 1947 को आजादी से पहले दो देश बन गए. इसके बाद भी ये सिलसिला नहीं थमा. देश को एक सूत्र में बांधने के लिए जब संविधान गढ़ा जा रहा था, तो हमारे सिरमौर कश्मीर को एक खाई के जरिए संपूर्ण भारत से अलग रखा गया. इस खाई का नाम ‘धारा 370’ था. इसी खाई के सबसे बड़े विरोधी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे. आज हमारे इसी नायक की पुण्यतिथि है. आइये जानें पीएम मोदी के नेतृत्व में उनके सपने कैसे पूरे हो रहे हैं?

श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ‘एक देश, एक विधान और एक प्रधान’ का सपना देखा; हालांकि, यह 23 जून 1953 को उनकी मौत तक अधूरा ही रहा. सपना भले अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने एक ऐसे विचार की ज्योत जला दी थी, जिसे ठीक 66 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा किया. आज 23 जून को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि (बलिदान दिवस) के विशेष मौके पर आइए जानते हैं कि कैसे उनके विचार और पीएम मोदी के संकल्प ने मिलकर देश को एक नए सूत्र में बांधा है.

मंत्री पद त्याग से बलिदान तक का सफर

ब्रिटिश भारत की राजधानी कोलकाता समेत देशभर में जब क्रांति की आग सुलग रही थी और वायसराय लॉर्ड कर्जन की नीतियों के कारण भारतीयों में राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भरता का विचार जाग रहा था; उसी दौरान बारिश के खुशनुमा मौसम के बीच 6 जुलाई 1901, दिन शनिवार की दोपहर कोलकाता के एक प्रतिष्ठित बंगाली परिवार के आशुतोष मुखर्जी और जोगमाया देवी के घर एक बालक का जन्म होता है. माता-पिता ने इस बच्चे का नाम श्यामा प्रसाद रखा. चूंकि पिता जाने-माने शिक्षाविद थे, इस कारण उनके विचारों का प्रभाव श्यामा प्रसाद पर बहुत गहरा रहा.

प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में होने के बाद उन्होंने देश-विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त की. इसी दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी देश के आजादी के आंदोलन से जुड़ गए. देश की आजादी के बाद वे केंद्र सरकार में मंत्री भी बने, लेकिन कश्मीर की अखंडता के लिए उन्होंने सरकार का सुख हंसते-हंसते त्याग दिया. अंत में, राष्ट्र की एकता के लिए एक अधूरे सपने के साथ वे 23 जून 1953 को इस दुनिया को छोड़कर चले गए.

नेहरू के सामने बुलंद हुआ ‘एक देश, एक विधान’ का नारा

जब भारत अपना संविधान लिख रहा था, तब कश्मीर को धारा 370 के जरिए देश से अलग रखा गया. आजाद देश में वहां एक अलग संविधान और अलग व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव आया. यह फैसला उस दौर के कद्दावर नेता और संविधान सभा के सदस्य डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बिल्कुल रास नहीं आया.

उन्होंने इसके खिलाफ ‘एक देश, एक विधान’ का नारा बुलंद कर दिया. उनका स्पष्ट मानना था कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इसे अलग विशेष दर्जा देने से देश की एकता हमेशा के लिए खतरे में आ सकती है. इस वैचारिक मतभेद के कारण वे खुलकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विरोध में आ गए. हालांकि, उस दौर में जवाहरलाल नेहरू की राजनीतिक ताकत के सामने डॉ. मुखर्जी की आवाज को दबाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन उनके इरादे डिगे नहीं.

पीएम मोदी ने साकार किया सपना

कहावत है कि विचारों को कभी जंजीरों में नहीं बांधा जा सकता. डॉ. मुखर्जी का सपना उनके जीवनकाल में भले अधूरा रह गया, लेकिन उनके विचारों की लौ लगातार जलती रही. इसी का परिणाम रहा कि ठीक 66 साल बाद 5 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐतिहासिक साहसिक फैसला लिया. उन्होंने संसद में भारी बहुमत से प्रस्ताव पारित कर धारा 370 को हमेशा के लिए खत्म कर दिया और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अधूरे सपने को साकार कर दिया. इसके बाद कश्मीर पूरी तरह भारत का हिस्सा बन गया और वहां भी देश का एक कानून, एक संविधान और एक प्रधान लागू हो गया.

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अधूरे सपनों को पूरा करने की बात करते हैं, और यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं है; यह उनकी सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. मोदी सरकार ने डॉ. मुखर्जी की प्रेरणा से देश के सामुदायिक विकास को रफ्तार देते हुए भारत को एक सूत्र में पिरोने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं:

  • एक राष्ट्र, एक विधान: 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जे से मुक्त कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया और भारतीय संविधान की पूर्ण व्यवस्था लागू की गई, जो डॉ. मुखर्जी का मूल सपना था.
  • एक राष्ट्र, एक कर (GST): साल 2017 में लागू हुआ वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) भारत में पहली बार एक समान कर प्रणाली लेकर आया, जिसने पूरे देश में एक कर व्यवस्था लागू कर आर्थिक एकता की मजबूत नींव रखी.
  • एक देश, एक राशन कार्ड: यह योजना देश के लाखों प्रवासी मजदूरों के लिए वरदान साबित हुई है. अब कोई भी भारतीय नागरिक देश के किसी भी राज्य में रहकर अपने पुराने राशन कार्ड से सब्सिडी वाला अनाज प्राप्त कर सकता है.
  • एक राष्ट्र, एक चुनाव: भारत में लगातार होने वाले चुनावों के कारण नीति निर्माण रुकता है और प्रशासनिक तंत्र थकता है. मोदी सरकार अब ‘एक देश, एक चुनाव’ की दिशा में भी कदम बढ़ा चुकी है.
  • डिजिटल इंडिया और एक डिजिटल पहचान: मोदी सरकार में डॉ. मुखर्जी के विचारों का सबसे बेहतर समावेश डिजिटल इंडिया के रूप में दिखता है. आज आधार कार्ड, यूपीआई, डिजिटल पेमेंट और डिजिलॉकर जैसी सुविधाओं के जरिए देश का कोई भी नागरिक कहीं से भी बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा और पहचान सेवाओं का लाभ उठा रहा है.
  • एक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP): देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आ चुकी है, जिसे धीरे-धीरे पूरे देश में लागू किया जा रहा है ताकि देशभर में सभी स्कूली बच्चों को लगभग एक समान शिक्षा मिले और उनका समावेशी विकास हो सके.
  • सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का उत्थान: डॉ. मुखर्जी ने हमेशा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया था. आज देश में राम मंदिर का भव्य निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का विकास और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना इसी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं.

विचार से करवट लेता है इतिहास

आज देश में राम मंदिर का निर्माण हुआ है, कश्मीर से कनेक्टिविटी लगातार बढ़ रही है और हर मोर्चे पर सरकार के काम में वही भाव झलक रहा है जिसका बीज डॉ. मुखर्जी ने बोया था. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन एक गहरे संघर्ष की मिसाल है. उन्होंने जिस अखंड भारत की कल्पना की थी, उसके लिए न सिर्फ सपने देखे बल्कि अपना जीवन भी बलिदान कर दिया.

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यह कहना गलत नहीं होगा कि डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व और उनके विचारों ने भारत को एक सूत्र में बांधा है. जब विचार जीवित रहते हैं, तो वे एक न एक दिन इतिहास को करवट बदलने पर मजबूर कर देते हैं. उनके सपनों का यही विचार आज भी जीवित है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल पूरा किया बल्कि उससे कई कदम आगे बढ़कर देश को तेज रफ्तार से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ा रहे हैं.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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