अफजाल अंसारी ने की मोहन भागवत की तारीफ
Afzal Ansari Praises Mohan Bhagwat: राजनीति में अक्सर ‘दुश्मनी’ और ‘दोस्ती’ के मायने पल-पल बदलते रहते हैं. इसी का एक उदाहरण हाल ही में देखने को मिला जब समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अफजाल अंसारी ने एक चौंकाने वाला बयान दिया. आमतौर पर भाजपा और उसके शीर्ष नेताओं पर हमलावर रहने वाले अंसारी ने इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत की खुलकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व करने के लिए संसार में आरएसएस से बढ़कर कोई प्लेटफार्म नहीं है और लोगों को भागवत से सीख लेनी चाहिए. ऐसे में सवाल उठने लगा है कि कहीं वो सपा से नाराज तो नहीं हैं.
बता दें कुछ समय पहले मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) दिल्ली के विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे. इस दौरान मंच से संबोधित करते हुए उन्होंने कई विषयों पर अपनी राय रखी थी. उन्होंने जनसंख्या के साथ ही राजनीति और नफरत को लेकर कई बातें कहीं थी. अब उनके इस बयान पर देश में चर्चा हो रही है.
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अफजाल अंसारी ने कहा, “हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व करने के लिए संसार में आरएसएस से बढ़कर कोई प्लेटफार्म नहीं है. भागवत ने कहा है कि अगर हर मस्जिद और मजार में शिवलिंग तलाश करोगे तो ये देश को कमजोर करेगा. संघ प्रमुख (RSS Chief Mohan Bhagwat) से कुछ लोगों को नसीहत लेनी चाहिए.” उन्होंने आगे कहा कि अन्य धर्मों के धर्मगुरुओं को भी संघ प्रमुख के वक्तव्य का स्वागत करना चाहिए. अंसारी ने कहा कि भागवत ने सही कहा है कि देश में एकता और भाईचारे की जरूरत है और नफरत का कारोबार बंद होना चाहिए.
अफजाल अंसारी ने बिना नाम लिए भाजपा के बड़े नेताओं पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा, “जिसके पास अपना परिवार नहीं होता, वह दूसरों के परिवार का दर्द क्या ही समझेगा.” यह बयान भाजपा नेताओं के परिवार और समाज के प्रति उनकी समझ पर सवाल उठाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि अडानी को बचाने के लिए सरकार चुप है और दुनिया का कोई भी देश खुलकर भारत के पक्ष में नहीं बोल रहा है. यह बयान केंद्र सरकार की विदेश नीति और आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाता है.
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अफजाल अंसारी का यह बयान राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ सकता है. एक तरफ उन्होंने मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) की तारीफ करते हुए उनके भाईचारे और देश में एकता के संदेश को सराहा, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने बिना नाम लिए भाजपा पर तीखा हमला भी बोला. उन्होंने ट्रंप के टैरिफ और पहलगाम हमले जैसी घटनाओं पर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए. उनका यह रुख यह दर्शाता है कि वह आरएसएस के संदेशों से सहमत हैं, जबकि भाजपा की कुछ नीतियों से उनकी असहमति है.
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