उत्तर प्रदेश

उन्नाव दुष्कर्म मामला: सेंगर की जमानत पर दिल्ली हाई कोर्ट तय करेगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने मामला दिल्ली हाई कोर्ट को भेज दिया है. जानिए क्या है पूरा मामला:

सुप्रीम कोर्ट ने मामला दिल्ली हाई कोर्ट को भेजा

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि दिल्ली हाई कोर्ट सेंगर की अपील और विक्टिम द्वारा सजा बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर योग्यता के आधार पर तीन महीने में निपटारा करें. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम कोई भी ओपिनियन नहीं दे रहे है. चूंकि सजा की अवधि आरोपी जेल में काट चुका है इसलिए जमानत की मांग पर हाई कोर्ट तीन महीने में फैसला करें. 11 फरवरी से दिल्ली हाई कोर्ट रोजाना सुनवाई करने वाला है. 18 जनवरी को दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था. सेंगर ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. हिरासत में मौत मामले में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को 10 साल की जेल की सजा सुनाई है.

सुप्रीम कोर्ट पहले ही हाई कोर्ट की ओर से सेंगर को दी गई जमानत पर रोक लगा चुका है. दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, कि सेंगर के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें इस मामले में जमानत नहीं दी जा सकती है. अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि यदि दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील पर शीघ्रता से फैसला किया जाता है तो उनके हित में होगा.

लंबी हिरासत, अपील में देरी और सुरक्षा पर उठे सवाल

अदालत ने यह भी कहा था कि सेंगर 10 साल की कुल सजा में से लगभग 7.5 साल हिरासत में बिता चुके है और इस मामले में दोषसिद्धि के विरुद्ध उनकी अपील पर फैसला होने में देरी हुई है, जिसका आंशिक कारण सेंगर द्वारा कई याचिकाएं दायर करना है. मामले की सुनवाई के दौरान रेप पीड़िता की ओर से पेश वकील महमूद प्राचा ने दलील दी थी कि कुलदीप सिंह सेंगर जमानत के हकदार नहीं है क्योंकि पीड़िता और उसके परिवार को खतरा है. उसे सोशल मीडिया पर परेशान किया जा रहा है और उसपर आरोप लगा कर बदनाम किया जा रहा है.

10 साल की सजा और 10 लाख रुपये का जुर्माना

ज्ञात हो कि कुलदीप सिंह सेंगर पर आरोप है कि साल 2017 में पीड़ित का अपहरण कर उससे बलात्कार करने का दोष साबित हुआ था. घटना के समय पीड़ित नाबालिग थी. 13 मार्च 2020 को निचली अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की कठोर सजा और 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. निचली अदालत ने फैसला देते हुए कहा था कि परिवार के एक मात्र कमाने वाले कि हत्या के लिए कोई नरमी नहीं बरती जा सकती.

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-भारत एक्सप्रेस

Edited By: Shubhra Rai (Intern)

गोपाल कृष्ण

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