यूपी के 10 जिलों में 10 साल में बदला समीकरण
UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने के लिए सिर्फ पूरे राज्य के आंकड़े देखना काफी नहीं होता. कई बार कुछ जिलों का प्रदर्शन ही चुनावी नतीजों की दिशा तय कर देता है. यूपी में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं, लेकिन इनमें से कुछ जिलों की सीटों की कहानी बेहद दिलचस्प है.
साल 2027 में यूपी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में 2012 और 2022 के नतीजों पर नजर डालें तो 10 जिलों में सीटों का संतुलन पूरी तरह बदल गया. इनमें अलीगढ़, कानपुर, प्रयागराज, उन्नाव, देवरिया, गोंडा, लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर खीरी और हरदोई शामिल हैं.
इन जिलों की कुल 88 सीटें हैं. 2012 में समाजवादी पार्टी ने इन जिलों में 61 सीटें जीती थीं. लेकिन 2022 में बीजेपी ने 78 सीटों पर कब्जा कर लिया. यानी एक दशक में इन इलाकों का चुनावी नक्शा पूरी तरह बदल गया.
अलीगढ़ की 7 सीटों में 2012 में सपा ने 4 जीती थीं, जबकि 2022 में बीजेपी ने सभी 7 सीटें जीत लीं. देवरिया की 7 सीटों में 2012 में सपा ने 5 पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 2022 में बीजेपी ने सभी सीटें अपने नाम कर लीं.
गोंडा में 2012 में सपा ने 6 सीटें जीती थीं और बीजेपी को सिर्फ एक सीट मिली थी. 2022 में बीजेपी ने सभी 7 सीटें जीत लीं. उन्नाव की 6 सीटों में 2012 में सपा ने 5 पर जीत हासिल की थी, लेकिन 2022 में बीजेपी ने सभी सीटें अपने खाते में डाल लीं.
लखीमपुर खीरी की 7 सीटों में 2012 में सपा ने 4 जीती थीं. 2022 में बीजेपी ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की. यह बदलाव दिखाता है कि यहां बीजेपी ने सपा का पूरा आधार खत्म कर दिया.
सीतापुर की 9 सीटों में 2012 में सपा ने 7 जीती थीं. 2022 में बीजेपी ने 8 सीटें जीत लीं और सपा को सिर्फ एक सीट मिली. हरदोई की 8 सीटों में 2012 में सपा ने 6 और बसपा ने 2 सीटें जीती थीं. 2022 में बीजेपी ने सभी 8 सीटों पर कब्जा कर लिया.
लखनऊ की 9 सीटों में 2012 में सपा ने 7 जीती थीं. 2022 में बीजेपी ने 7 सीटें जीतीं और सपा को 2 सीटें मिलीं. यानी यहां मुकाबला थोड़ा संतुलित रहा, लेकिन बीजेपी का पलड़ा भारी रहा.
कानपुर शहर और कानपुर देहात की 14 सीटों में 2012 में सपा ने 8 जीती थीं. 2022 में बीजेपी ने 11 सीटें अपने नाम कीं. यहां भी बीजेपी ने सपा को पीछे छोड़ दिया.
प्रयागराज की 12 सीटों में 2012 में सपा ने 8 जीती थीं. 2022 में बीजेपी ने 8 सीटों पर जीत हासिल की. वोट प्रतिशत भी बदला. 2012 में सपा का वोट हिस्सा करीब 28.7% था, जबकि 2022 में बीजेपी का वोट हिस्सा 56.8% तक पहुंच गया.
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इन 10 जिलों की कहानी बताती है कि यूपी की राजनीति में सीटों का समीकरण कितनी तेजी से बदल सकता है. 2012 में जहां सपा का दबदबा था, वहीं 2022 में बीजेपी ने लगभग पूरा नक्शा पलट दिया. 2027 के चुनाव से पहले इन जिलों पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि यहां का प्रदर्शन पूरे प्रदेश की तस्वीर बदल सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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