Akhilesh Yadav
Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश की सियासत में अलग रुआब रखने वाली समाजवादी पार्टी को लोग यादव और मुस्लिमों की पार्टी के तौर पर जोड़कर देखते हैं. साल 2014 के बाद एक के बाद एक चुनाव हारने के बाद अखिलेश यादव ने अपने सियासी फलसफे में एक नया फॉर्मूला यूज किया. उन्होंने MY (मुस्लिम-यादव) की जगह PDA (पिछड़ा+दलित+अल्पसंख्यक) को तरजीह देनी शुरू की. जिसका उन्हें साल 2024 के लोकसभा चुनाव में फायदा भी मिला. अब उत्तर प्रदेश में अगले साल एक बार फिर विधानसभा चुनाव होने हैं. जिसकी तैयारियां अखिलेश यादव ने अभी से शुरू कर दी है. वो जानते हैं कि इस चुनाव में जीत के लिए सिर्फ पीडीए पर निर्भर रहना खतरनाक है. इसलिए उन्होंने बीजेपी के परंपरागत वोटबैंक में सेंध लगानी की कवायद शुरू कर दी है.
अखिलेश यादव ने यूपी में ब्राह्मण वोटों को अपनी तरफ लाने के लिए दो प्रमुख ब्राह्मण चेहरों पूर्व विधायक पवन पांडेय और सांसद सनातन पांडेय को आगे किया है. दोनों नेता मुखर होकर ब्राह्मणों के मुद्दों को उठा रहे हैं. सनातन पांडेय जहां यूपी के अलग-अलग जिलों में जाकर ब्राह्मण सम्मेलन कर रहे हैं. तो वहीं दूसरी तरफ पवन पांडेय अयोध्या राम लला चढ़ावा चोरी मामले को जोर-शोर से उठा रहे हैं.
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर किसी नेता ने सबसे ज्यादा मीडिया में बाइट दी है तो वो पवन पांडेय ही हैं. उन्होंने जिस आक्रामकता से इस मुद्दे को उठाया है, उसने लखनऊ से दिल्ली तक हलचल मचा दी है. बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने इस पूरे कांड को हैंडल करने की जिम्मेदारी पवन पांडेय को ही सौंपी है.
यूपी के दो अलग-अलग मिजाज रखने वाले इलाकों में समाजवादी पार्टी को मजबूत करने के लिए अखिलेश यादव डबल अटैक का प्लान कर रहे हैं. एक तरफ वो अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सरकार को सनातन और हिंदू विरोधी साबित करने की कोशिश कर रहे हैं. जिसकी कमान पवन पांडेय के हाथों में है. तो वहीं पूर्वांचल के इलाके में मौजूद ब्राह्मण वोटों को सपा की तरफ करने में सनातन पांडेय प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं.
पूर्वांचल में सनातन पांडेय जगह-जगह ब्राह्मण सम्मेलन कर रहे हैं. जिसमें वो बता रहे हैं कि यूपी की योगी सरकार में ब्राह्मणों को वो सम्मान नहीं मिला, जिसके वो हकदार थे. जबकि ब्राह्मणों ने भर-भरकर बीजेपी को वोट किया.
बता दें कि पूर्वांचल में खास तौर पर गोरखपुर मंडल में ब्राह्मण वोटों की संख्या सबसे ज्यादा है. इस इलाके में ठाकुर बनाम ब्रह्मण का पुराना नैरेटिव चलता रहा है. गोरखपुर में जहां एक तरफ हरिशंकर तिवारी का राज चलता था, तो दूसरी तरफ मठ का. जिसके झंडाबदार यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ थे. गोरखपुर इलाके के कई ब्राह्मण बाहुल्य इलाकों के ब्राह्मण वोटर योगी की कार्यशैली से नाराज बताये जा रहे हैं. ऐसे में सनातन पांडेय उन्हें सपा की तरफ धकेलकर बीजेपी को बड़ा सेटबैक देने की फिराक में हैं.
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हालांकि अभी यूपी विधानसभा चुनाव में लगभग एक साल का समय है. बीजेपी अभी राम मंदिर चढ़ावा चोरी और यूजीसी के मुद्दे पर बैकफुट पर है. दूसरी तरफ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने यह कहकर पूरे पॉलिटिकल सीनेमा का पटाक्षेप कर दिया है कि अगला यूपी इलेक्शन योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर लड़ा जाएगा. अब देखना दिलचस्प होगा कि दोनों ब्राह्मण चेहरे मिलकर बीजेपी को कितना डेंट दे सकते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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