उत्तर प्रदेश में वक्फ की संपत्तियों को लेकर इस वक्त की एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर(UP Waqf Property Registration Cancelled) सामने आ रही है. केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय की सख्ती के बाद यूपी में वक्फ की संपत्तियों पर अब तक का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व एक्शन लिया गया है. डिजिटल पारदर्शिता के लिए बनाए गए ‘उम्मीद पोर्टल’ पर दर्ज उत्तर प्रदेश की 31 हजार से ज्यादा वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन एक झटके में रद्द कर दिया गया है.
जांच के दौरान इन संपत्तियों के दस्तावेजों में भारी हेरफेर, गंभीर खामियां और कई तकनीकी त्रुटियां पाई गईं, जिसके बाद प्रशासन ने यह कड़ा कदम उठाया है. इस सामूहिक डिजिटल स्ट्राइक के बाद से ही पूरे प्रदेश के वक्फ बोर्डों और संबंधित भू-माफियाओं के खेमे में हड़कंप और अफरातफरी मच गई है.
दरअसल, वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और अवैध कब्जों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल ही सभी संपत्तियों का पूरा ब्योरा डिजिटल ‘उम्मीद पोर्टल’ पर दर्ज कराना अनिवार्य किया था. इस पोर्टल पर उत्तर प्रदेश से कुल 1,18,302 वक्फ संपत्तियों का ऑनलाइन पंजीकरण कराया गया था.
लेकिन जब राजस्व विभाग और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने इन दस्तावेजों का जमीनी स्तर पर भौतिक और डिजिटल मिलान शुरू किया, तो वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड की पोल खुल गई. जांच में पाया गया कि हजारों संपत्तियों के खसरा नंबर सरकारी रिकॉर्ड से मेल ही नहीं खा रहे थे, और कई मामलों में तो राजस्व अभिलेखों में दर्ज जमीन के रकबे (Area) में भारी बदलाव और हेरफेर किया गया था.
दस्तावेजों के मिलान के दौरान फर्जीवाड़े का एक और हैरान करने वाला पैटर्न सामने आया, जिसमें कई कब्रिस्तानों, मजारों और दरगाहों का एक ही खसरा नंबर दो-दो अलग-अलग वक्फ रिकॉर्ड्स में दर्ज पाया गया. यानी एक ही जमीन को दो अलग-अलग संपत्तियों के रूप में दिखाकर सरकारी पोर्टल को गुमराह करने का खेल चल रहा था.
जब जिला प्रशासनों द्वारा इन विवादित और संदिग्ध संपत्तियों के दस्तावेजों का गहन सत्यापन (वेरिफिकेशन) मांगा गया, तो वक्फ प्रबंधन इसके पुख्ता सबूत और कागजात पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा. नतीजा यह हुआ कि सत्यापन न हो पाने के कारण पोर्टल से अब तक कुल 31,328 संपत्तियों का पंजीयन पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है.
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो इस डिजिटल कार्रवाई (UP Waqf Property Registration Cancelled) की सबसे तगड़ी गाज जौनपुर जनपद पर गिरी है, जहां रिकॉर्ड 1,938 वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन सीधे रद्द कर दिया गया है. इसके अलावा बाराबंकी में 1,521, मुजफ्फरनगर में 1,510, अलीगढ़ में 1,061 और बस्ती जिले में 1,000 वक्फ संपत्तियों का पंजीयन कैंसिल हुआ है.
यही नहीं, उन्नाव, सीतापुर, हरदोई, आजमगढ़ और राजधानी लखनऊ में भी बहुत बड़े पैमाने पर अवैध और त्रुटिपूर्ण संपत्तियों को पोर्टल से बाहर का रास्ता दिखाया गया है. इस कार्रवाई के बाद कई ऐसे कब्रिस्तानों और दरगाहों की वैधानिकता पर सीधे संकट मंडराने लगा है, जो सालों से बिना सही कागजातों के वक्फ के नाम पर चल रहे थे.
उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कुल संपत्तियों में से अब तक कड़े कूटनीतिक और प्रशासनिक फिल्टर से गुजरकर सिर्फ 53,711 संपत्तियों को ही सरकार की तरफ से अंतिम स्वीकृति (अप्रूवल) मिल सकी है. वहीं दूसरी तरफ, 20,546 अन्य वक्फ संपत्तियों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी और जांच अभी भी आखिरी और बेहद संवेदनशील चरण में चल रही है.
जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में रद्द होने वाली संपत्तियों का यह आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ सकता है. उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और इस कड़े एक्शन ने उन तमाम रसूखदार लोगों की नींद उड़ा दी है, जिन्होंने लंबे समय से सरकारी या निजी जमीनों को वक्फ की आड़ में दबा रखा था.
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-भारत एक्सप्रेस
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