अनंत पई (17 सितंबर 1929 – 24 फरवरी 2011), जिन्हें प्यार से अंकल पई कहा जाता था, भारतीय कॉमिक्स जगत के एक महान व्यक्तित्व थे. वे अमर चित्र कथा और टिंकल जैसी अमर रचनाओं के जनक थे, जिन्होंने लाखों-करोड़ों भारतीय बच्चों के बचपन को रोशन किया और उन्हें अपनी संस्कृति, इतिहास तथा पौराणिक कथाओं से जोड़ा.
अनंत पई का जन्म कर्नाटक के कार्कला (Karkala) में एक गौड़ सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था. बचपन में ही उनके माता-पिता का देहांत हो गया, जिसके बाद उनके नाना-नानी और बाद में चाचा ने उनका पालन-पोषण किया. 12 वर्ष की आयु में वे मुंबई आ गए, जहां उन्होंने ओरिएंट स्कूल से पढ़ाई की. आगे चलकर उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की, लेकिन उनका मन हमेशा से कहानियों, शिक्षा और बच्चों की दुनिया में रमा रहा.
शुरुआत में उन्होंने माणव नाम की एक बाल-पत्रिका शुरू करने की कोशिश की, जो सफल नहीं हुई. बाद में वे टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के बुक्स डिवीजन में शामिल हुए और यहां इंद्रजाल कॉमिक्स (जिसमें मंद्रेक, फैंटम जैसे विदेशी सुपरहीरो थे) के लॉन्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट 1967 में आया, जब दिल्ली में एक टीवी क्विज शो देखते हुए उन्होंने देखा कि बच्चे ग्रीक माइथोलॉजी के सवाल आसानी से बता देते हैं, लेकिन जब रामायण में राम की मां का नाम पूछा गया, तो कोई जवाब नहीं दे सका. यह बात अनंत पई को बहुत चुभ गई. उन्हें लगा कि भारतीय बच्चे अपनी ही संस्कृति और इतिहास से अनजान हैं, जबकि पश्चिमी कथाएं उन्हें अच्छी तरह याद हैं.
इसी प्रेरणा से उन्होंने अमर चित्र कथा (Immortal Picture Stories) की शुरुआत की. उन्होंने टाइम्स की नौकरी छोड़ दी और कई प्रकाशकों के पास यह विचार लेकर गए कि भारतीय पौराणिक कथाएं, इतिहास, लोककथाएं और महान व्यक्तियों की जीवनियां कॉमिक्स फॉर्मेट में बच्चों तक पहुंचाई जाएं. कई प्रकाशकों (जैसे Allied, Jaico) ने मना कर दिया, लेकिन इंडिया बुक हाउस के जी. एल. मिर्चंदानी ने सहयोग किया. 1967-70 के आसपास पहला अंक कृष्ण प्रकाशित हुआ, और धीरे-धीरे यह एक पूरी सीरीज बन गई.
अमर चित्र कथा में रामायण, महाभारत, विभिन्न पुराणों की कथाएं, अकबर-बीरबल, तेनालीराम, बुद्ध, कबीर, झांसी की रानी, विवेकानंद, तिलक, टैगोर जैसी ऐतिहासिक जीवनियां शामिल हुईं. अनंत पई खुद लेखक, संपादक, रिसर्चर और प्रकाशक की भूमिका निभाते थे. यह सीरीज 400 से अधिक शीर्षकों तक पहुंची, 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में अनूदित हुई और 8-10 करोड़ (कुछ स्रोतों में 10 करोड़ से अधिक) प्रतियां बिकीं. इसे राष्ट्रीय एकीकरण की एक शांत परियोजना भी कहा जाता है, क्योंकि इससे अलग-अलग क्षेत्रों के बच्चे एक ही कहानियां पढ़ते थे.
1969 में उन्होंने रंग रेखा फीचर्स नाम से भारत का पहला कॉमिक्स सिंडिकेट शुरू किया. 1980 में इसी के तहत टिंकल पत्रिका लॉन्च हुई, जो बच्चों की मासिक पत्रिका थी. टिंकल में शिकारी शंभू, सुप्पंडी, तन्मय , शेकर जैसे मजेदार पात्र, विज्ञान कहानियां, पहेलियां, चुटकुले और क्विज कॉलम थे. यह पत्रिका भी बेहद लोकप्रिय हुई और आज भी प्रकाशित हो रही है.
अनंत पई ने बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ हंसाने और उनकी रचनात्मकता बढ़ाने का काम किया. उन्हें फादर ऑफ इंडियन कॉमिक्स, भारत का मास्टर स्टोरीटेलर और भारत का वॉल्ट डिज्नी कहा गया.
24 फरवरी 2011 को 81 वर्ष की आयु में हृदयाघात से उनका निधन हो गया. उनकी मृत्यु पर BBC, New York Times और भारतीय मीडिया ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. अंकल पई की विरासत आज भी अमर है. उनकी कहानियां नई पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखती हैं. अंकल पई की याद में बचपन की वो रंगीन किताबें, जो सिर्फ पढ़ने की नहीं, बल्कि जीने की सीख देती थीं.
हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित इस महान व्यक्तित्व को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र नमन है.
ये भी पढ़ें: चीन की ‘डेब्ट ट्रैप डिप्लोमेसी’ और अफ्रीका में बंदरगाहों पर बढ़ता प्रभाव
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
Pitru Paksha Panchang: 29 सितंबर 2026 को पितृ पक्ष के अंतर्गत तृतीया श्राद्ध है. पंचांग…
पहलगाम की अरु घाटी में मोबाइल नेटवर्क, एटीएम, स्वास्थ्य और शौचालय की भारी कमी। सैलानी…
Mandal Vs Kamandal: एलके आडवाणी की रथ यात्रा 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ…
Lalu Prasad Yadav: लालू प्रसाद यादव के उभार की कहानी सिर्फ एक राजनेता की जीवनी…
VIGILANCE RAID ON BIHAR OFFICER COUPLE: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance)…
Lalu Prasad Yadav: भारतीय लोकतंत्र में लालू प्रसाद यादव की पहचान एक खास राजनीतिक शैली…