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‘स्टीफन हॉकिंग वाली लीग में शामिल हुए भारतीय वैज्ञानिक’ प्रो. दीपक धर को मिला सैद्धांतिक भौतिकी का सर्वोच्च डिराक मेडल

74 वर्षीय भारतीय भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर दीपक धर को 2026 का डिराक मेडल (Dirac Medal) प्रदान किया गया है. यह सम्मान सांख्यिकीय यांत्रिकी (statistical mechanics) में उनके योगदान के लिए दिया गया है. यह पुरस्कार सैद्धांतिक भौतिकी के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है और इसके पूर्व विजेताओं में स्टीफन हॉकिंग जैसे नाम शामिल हैं.

बचपन और शिक्षा

दीपक धर का जन्म 1951 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में हुआ. हिंदी माध्यम के माहौल में पले-बढ़े धर की वैज्ञानिक जिज्ञासा उनके पिता ने जगाई, जो घर पर विज्ञान की पत्रिकाएं लाते थे. मां चाहती थीं कि वे आईएएस अधिकारी बनें, लेकिन पिता की प्रोत्साहन से वे विज्ञान की ओर मुड़े.

उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक किया, आईआईटी कानपुर से एमएससी और कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कैलटेक) से 1978 में पीएचडी पूरी की. कैलटेक में वे रिचर्ड फेनमैन फेलो रहे और महान भौतिक विज्ञानी रिचर्ड फेनमैन के टीचिंग असिस्टेंट के रूप में काम किया.

भारत लौटना और शोध यात्रा

अमेरिका में रहने के कई अवसर होने के बावजूद धर ने भारत लौटने का फैसला किया. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) मुंबई में उन्होंने दशकों तक शोध किया. बाद में आईआईएसईआर पुणे और वर्तमान में आईसीटीएस-टीआईएफआर बेंगलुरु में आईएनएसए डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं.

उनका प्रमुख योगदान स्व-संगठित क्रिटिकलिटी (self-organized criticality) और सैंडपाइल मॉडल में है. उन्होंने दिखाया कि सरल अंतःक्रियाएं कैसे बड़े और कभी-कभी अप्रत्याशित व्यवहार को जन्म दे सकती हैं, जैसे रेत के ढेर में एक-एक कण जोड़ने पर कभी छोटी, कभी बड़ी हिमस्खलन जैसी घटनाएं. यह अवधारणा भूकंप, ट्रैफिक जाम और वित्तीय उतार-चढ़ाव जैसे जटिल तंत्रों को समझने में उपयोगी साबित हुई है.

पुरस्कार और सम्मान

  • 2022 : बोल्ट्जमैन मेडल- सांख्यिकीय भौतिकी का सर्वोच्च सम्मान; वे इसके पहले भारतीय विजेता बने.
  • 2023 : पद्म भूषण.
  • 2026 : डिराक मेडल (ICTS द्वारा). इस साल का सम्मान उन्होंने बर्नार्ड डेरिडा, मार्क मेजार्ड और हैम सोम्पोलिंस्की के साथ साझा किया है. यह पुरस्कार संतुलन और असमानता सांख्यिकीय यांत्रिकी, अनुकूलन समस्याओं, सैद्धांतिक तंत्रिका विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक उनके योगदान को मान्यता देता है.

इसके अलावा उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, टीडब्ल्यूएएस पुरस्कार, आईएनएसए युवा वैज्ञानिक पदक सहित कई सम्मान मिल चुके हैं.

प्रेरणा का स्रोत

विज्ञान पत्रिकाओं से शुरू हुई यह यात्रा आज वैश्विक पहचान तक पहुंची है. प्रोफेसर धर न केवल शोधकर्ता हैं, बल्कि कई पीढ़ियों के शोधकर्ताओं के मार्गदर्शक भी रहे हैं. उनका जीवन दिखाता है कि जिज्ञासा, सरल प्रश्नों पर गहराई से सोचने की आदत और अपने देश में शोध करने का संकल्प कैसे विश्व स्तर की उपलब्धियां दिला सकता है.

उनकी सफलता भारतीय सैद्धांतिक भौतिकी के लिए गर्व का विषय है और युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी.

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-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

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