विशेष

कमरे के कंप्यूटर से जेब तक, जानिए दुनिया की सबसे छोटी चिप ने कैसे बदली हमारी जिंदगी?

आज हमारे हाथ में मौजूद स्मार्टफोन से लेकर कार, लैपटॉप, स्मार्टवॉच और मेडिकल मशीनों तक—शायद ही कोई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हो, जिसका रिश्ता चिप से न हो. लेकिन कभी यही तकनीक इतनी बड़ी थी कि कंप्यूटरों के लिए पूरे कमरे की जरूरत पड़ती थी. इस तस्वीर को बदलने वाली एक ऐतिहासिक शुरुआत 12 सितंबर 1958 को हुई थी.

इसी दिन अमेरिका की टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स की प्रयोगशाला में इंजीनियर जैक एस. किल्बी ने दुनिया के सामने पहला काम करने वाला इंटीग्रेटेड सर्किट यानी IC पेश किया. देखने में यह बेहद छोटा और साधारण था, लेकिन इसका महत्व बहुत बड़ा था. किल्बी ने जर्मेनियम के एक छोटे से टुकड़े पर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तैयार किया, जिसमें ट्रांजिस्टर, रेसिस्टर और कैपेसिटर जैसे जरूरी हिस्से एक ही सेमीकंडक्टर सामग्री पर मौजूद थे.

उस समय इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने में सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि अलग-अलग कंपोनेंट्स को आपस में जोड़ना पड़ता था. जैसे-जैसे सर्किट जटिल होते गए, तारों और अलग-अलग हिस्सों की संख्या बढ़ती गई. इंजीनियर इसे “टाइरनी ऑफ नंबर्स” यानी कंपोनेंट्स की बढ़ती संख्या की समस्या कहते थे.

किल्बी ने इसी मुश्किल का हल खोजने की कोशिश की. जुलाई 1958 में कंपनी की छुट्टियों के दौरान उन्होंने इस विचार पर काम किया कि क्यों न सर्किट के सभी जरूरी हिस्सों को एक ही सेमीकंडक्टर ब्लॉक पर तैयार किया जाए. यही सोच आगे चलकर “मोनोलिथिक” इंटीग्रेटेड सर्किट के विचार में बदली.

12 सितंबर को जब किल्बी ने अपना प्रोटोटाइप चलाकर दिखाया, तो ऑसिलोस्कोप पर साइन वेव दिखाई दी. यह इस बात का सबूत था कि उनका छोटा-सा सर्किट वास्तव में काम कर रहा था.

आकार इतना छोटा कि यकीन करना मुश्किल

किल्बी की पहली चिप का आकार करीब 7/16 × 1/16 इंच था, यानी लगभग 11.1 मिलीमीटर × 1.6 मिलीमीटर. मोटे तौर पर कहें तो यह कागज की क्लिप के आधे हिस्से जितनी छोटी थी.

आज के हिसाब से यह तकनीक बेहद शुरुआती लग सकती है, लेकिन उस समय यह इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया में एक बड़ा बदलाव था. अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने के बजाय उन्हें एक ही जगह पर तैयार करने का विचार आगे चलकर माइक्रोचिप क्रांति की नींव बना.

पेटेंट से नोबेल पुरस्कार तक

किल्बी ने 6 फरवरी 1959 को “मिनिएचराइज्ड इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स” के लिए पेटेंट आवेदन दाखिल किया. उनका पेटेंट बाद में US Patent 3,138,743 के रूप में दर्ज हुआ.

हालांकि, इंटीग्रेटेड सर्किट की कहानी सिर्फ किल्बी तक सीमित नहीं थी. इसी दौर में फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर के इंजीनियर रॉबर्ट नॉयस ने स्वतंत्र रूप से सिलिकॉन आधारित एक ऐसी तकनीक विकसित की, जो बड़े पैमाने पर चिप बनाने के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हुई.

इसी वजह से किल्बी और नॉयस दोनों को इंटीग्रेटेड सर्किट के सह-आविष्कारकों के रूप में याद किया जाता है. जहां किल्बी का शुरुआती डिजाइन वायर कनेक्शन पर आधारित था, वहीं नॉयस की प्लानर प्रक्रिया ने चिप के बड़े पैमाने पर उत्पादन का रास्ता आसान किया.

किल्बी के योगदान को दुनिया ने 2000 में नोबेल पुरस्कार के जरिए भी सम्मानित किया. उन्हें भौतिकी का नोबेल पुरस्कार इंटीग्रेटेड सर्किट के आविष्कार में उनकी भूमिका के लिए दिया गया.

कुछ ही साल में कंप्यूटर भी बदल गया

इस तकनीक का असर बहुत तेजी से सामने आया. 1961 में टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स ने अमेरिकी वायु सेना के लिए इंटीग्रेटेड सर्किट पर आधारित कंप्यूटर तैयार किया. इसका आकार केवल 6.3 क्यूबिक इंच और वजन करीब 10 औंस था.

उस दौर के पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में यह लगभग 150 गुना छोटा और 48 गुना हल्का था. इसमें 587 डिजिटल सर्किट इस्तेमाल किए गए थे. यह उदाहरण दिखाता है कि एक छोटी सी चिप किस तरह इलेक्ट्रॉनिक मशीनों को छोटा, हल्का और ज्यादा व्यावहारिक बना सकती है.

कमरे से जेब तक पहुंची कंप्यूटिंग

इंटीग्रेटेड सर्किट के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया ने जैसे रफ्तार पकड़ ली. कंप्यूटर छोटे होते गए, उनकी क्षमता बढ़ती गई और कुछ ही दशकों में ऐसी मशीनें सामने आने लगीं जिन्हें लोग अपने साथ लेकर चल सकते थे.

आज मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल कैमरा, स्मार्टवॉच, कारों के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, मेडिकल उपकरण और इंटरनेट से जुड़े अनगिनत डिवाइस इसी चिप तकनीक की बदौलत संभव हैं. किल्बी ने आगे चलकर हैंडहेल्ड कैलकुलेटर के विकास में भी अहम भूमिका निभाई.

यह भी पढ़ें: आयुर्वेद को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाई देने की पहल: AIIA और विश्व आयुर्वेद परिषद के बीच बड़ा समझौता

-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

Recent Posts

आखिर क्या चल रहा है प्रेमानंद महाराज के आश्रम में? पहले आत्महत्या फिर गुमशुदा अब लापता

Premanand Maharaj Ashram Missing Girl: नोएडा की 35 वर्षीय MBA पास युवती विभा 15 अगस्त…

32 minutes ago

सीएम नायब सैनी समेत हरियाणा बीजेपी के 48 विधायक पीएम मोदी से मिलेंगे, जानिए क्या है एजेंडा?

PM Modi Haryana BJP Meeting: हरियाणा सीएम नायब सिंह सैनी, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता…

1 hour ago

‘वैश्विक मंच पर गूंज रही भारत की संस्कृति!’ PM मोदी ने बताया गजेंद्र शेखावत के काम का सीक्रेट, तावड़े बोले- जय हो

Gajendra Singh Shekhawat: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जन्मदिन पर भाजपा सांसद विनोद तावड़े…

1 hour ago

गोल्ड लवर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! धनतेरस से ठीक पहले सोने के भाव होंगे धड़ाम, जानें आज के ताजा दाम

रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आने के बाद सोने और चांदी की कीमतों में लगातार सुस्ती…

2 hours ago

UP के 70 हजार शिक्षकों की बल्ले-बल्ले: 10 साल का इंतजार खत्म, दिवाली से पहले मिलेगा प्रमोशन का तोहफा

Diwali Gift UP Teachers: यूपी के परिषदीय स्कूलों में 2016 से अटका शिक्षकों का प्रमोशन…

2 hours ago