Operation Ajax: 1953 का वर्ष मध्य पूर्व के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. इस साल संयुक्त राज्य अमेरिका की CIA और ब्रिटेन की MI6 ने मिलकर ईरान के निर्वाचित प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्देग की सरकार को उखाड़ फेंका. इसे ऑपरेशन अजाक्स (अमेरिकी नाम) या ऑपरेशन बूट (ब्रिटिश नाम) के नाम से जाना जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश तेल हितों की रक्षा करना था, क्योंकि मोसद्देग ने ईरान की विशाल तेल संपदा को राष्ट्रीयकरण कर दिया था.
1951 में मोहम्मद मोसद्देग, एक राष्ट्रवादी नेता और ईरान के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री, ने एंग्लो-ईरानियन ऑयल कंपनी (जो आज BP के नाम से जानी जाती है) के ब्रिटिश नियंत्रण वाली ईरान की तेल संपदा को राष्ट्रीयकृत कर दिया. यह कदम ईरान की आर्थिक स्वतंत्रता और संसाधनों पर राष्ट्रीय नियंत्रण की मांग का प्रतीक था. ब्रिटेन के लिए यह बड़ा झटका था, क्योंकि कंपनी ब्रिटिश अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण थी.
ब्रिटेन ने आर्थिक प्रतिबंध लगाए, तेल निर्यात रोका और ईरान को अलग-थलग करने की कोशिश की. मोसद्देग की लोकप्रियता बढ़ती गई, लेकिन देश में अस्थिरता भी बढ़ी. शीत युद्ध के दौर में अमेरिका को डर था कि कम्युनिस्ट तुदेह पार्टी का प्रभाव बढ़ सकता है. इसलिए 1953 में राष्ट्रपति आइजनहावर ने ब्रिटेन के साथ मिलकर तख्तापलट की योजना को मंजूरी दी.
इस ऑपरेशन का प्रमुख संचालक अमेरिकी राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट के पोते केर्मिट “किम” रूजवेल्ट जूनियर थे. उन्होंने तेहरान में रहकर रिश्वत, प्रचार, नकली विरोध प्रदर्शन और सेना के कुछ अधिकारियों को अपने पक्ष में करने का जाल बिछाया. योजना में शाह मोहम्मद रजा पहलवी को शामिल किया गया, जिन्हें मोसद्देग के खिलाफ फरमान (शाही आदेश) जारी करने के लिए राजी किया गया.
शाह रोम से वापस लौटे और 26 वर्षों तक सत्ता में रहे. उन्होंने तेजी से अपना शासन स्थापित किया, पश्चिमी समर्थक नीतियां अपनाईं और तेल उद्योग में अमेरिकी-ब्रिटिश कंपनियों को हिस्सेदारी दी.
यह तख्तापलट सफल रहा, लेकिन इसने ईरान में गहरी अमेरिका-विरोधी भावना पैदा की. 1979 की ईरानी क्रांति में शाह को सत्ता से बेदखल कर दिया गया और वे निर्वासित होकर मर गए. कई इतिहासकार मानते हैं कि 1953 का हस्तक्षेप 1979 की इस्लामी क्रांति और आज के अमेरिका-ईरान तनाव की जड़ों में से एक है.
यह घटना लोकतंत्र के नाम पर विदेशी हस्तक्षेप का एक क्लासिक उदाहरण बनी, जिसने मध्य पूर्व की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया. मोसद्देग की सरकार आखिरी लोकतांत्रिक सरकार थी जो ईरान में सत्ता में आई. उसके बाद सत्ता शाह के हाथों में केंद्रित हो गई और बाद में धार्मिक नेतृत्व के पास चली गई.
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