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1857 से 51 साल पहले भड़की थी आजादी की पहली चिंगारी, जानें वेल्लोर विद्रोह की पूरी कहानी

जब भी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा होती है, तो अधिकांश लोगों के मन में 1857 की क्रांति का ही नाम आता है. लेकिन इससे आधी सदी पहले, 10 जुलाई 1806 को वेल्लोर के किले में भारतीय सिपाहियों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ एक साहसिक और संगठित विद्रोह किया. इतिहासकार इसे वेल्लोर विद्रोह (Vellore Mutiny) के नाम से जानते हैं. यह विद्रोह 1857 से बहुत पहले का था और भारतीय सैनिकों की एकजुटता तथा सांस्कृतिक पहचान के लिए लड़ने की भावना को दर्शाता है.

विद्रोह का कारण: सांस्कृतिक हस्तक्षेप

विद्रोह की जड़ अंग्रेजों के नए ड्रेस कोड में थी. कंपनी प्रशासन ने सिपाहियों के लिए नया वर्दी नियम लागू किया:

– हिंदू सिपाहियों को तिलक लगाने की मनाही.
– मुस्लिम सिपाहियों को दाढ़ी काटने का आदेश.
– सभी को एक विशेष कलगी (तुच्छ) वाली हैट पहननी अनिवार्य.

भारतीय सैनिकों के लिए ये नियम धार्मिक भावनाओं पर सीधा आघात थे. हिंदू सिपाही अपना तिलक नहीं छोड़ सकते थे और मुस्लिम सैनिक दाढ़ी काटने के लिए तैयार नहीं थे. जब उन्होंने विरोध किया तो अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें कोड़े मारे और कई सिपाहियों को सेना से बर्खास्त कर दिया. इससे सिपाहियों में गुस्सा भड़क उठा.

विद्रोह का दिन

उस दिन वेल्लोर किले में टीपू सुल्तान की एक बेटी की शादी हो रही थी. 1799 में टीपू सुल्तान की मृत्यु के बाद उनका परिवार ईस्ट इंडिया कंपनी की पेंशन पर निर्भर था और किले के एक हिस्से में रह रहा था. शादी के मौके पर विद्रोही सिपाही इकट्ठे हुए और उन्होंने फैसला कर लिया कि किले को अंग्रेजों से मुक्त कराया जाएगा.

शादी समाप्त होते ही सिपाहियों ने अपना प्लान अमल में लाया. उन्होंने सबसे पहले अपने अंग्रेज अधिकारियों पर हमला किया. किले के सेनापति कर्नल जॉन फैनकोर्ट सहित लगभग 200 अंग्रेज सैनिक मारे गए. पूरे किले में भारतीय सिपाही फैल गए. सुबह होते-होते पूरा किला उनके कब्जे में आ गया.

विद्रोह का दमन

वेल्लोर से मात्र 25 किलोमीटर दूर आर्कोट (Arcot) में ब्रिटिश सेना का बड़ा कैंप था. विद्रोह की खबर जैसे ही वहाँ पहुंची, अंग्रेजों ने भारी गोला-बारूद और सैनिकों के साथ तुरंत हमला बोल दिया. ब्रिटिश सेना किले में घुसी और बिना किसी भेदभाव के भारतीय सैनिकों का नरसंहार शुरू कर दिया.

जो भी सिपाही दिखाई दिया, उसे गोली से भून दिया गया. कुछ ही घंटों में सैकड़ों भारतीय सैनिक शहीद हो गए. विद्रोह को कुचल दिया गया.

ऐतिहासिक महत्व

वेल्लोर विद्रोह हालांकि छोटे समय के लिए सफल रहा, लेकिन इसका महत्व बहुत बड़ा था. बता दें कि यह:

– 1857 की क्रांति का पूर्व रूप था.
– सैनिकों में धार्मिक भावनाओं का सम्मान न करने पर ब्रिटिश नीति के खिलाफ पहला बड़ा संगठित विरोध था.
– हिंदू-मुस्लिम सिपाहियों के बीच एकता का उदाहरण प्रस्तुत करता है.

वहीं, आज भी वेल्लोर का किला उस वीरता की गवाही देता है, जब भारतीय सैनिकों ने अपनी पहचान, धर्म और स्वाभिमान के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावत की.

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-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

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