Bihar Diwas In Mauritius: मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई में भारत के उच्चायोग और बिहार सरकार के संयुक्त सहयोग से 20 से 22 मार्च तक बिहार उत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया गया. यह आयोजन बिहार दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी भारतीय सांस्कृतिक केंद्र में हुआ, जिसमें मॉरीशस सरकार के शीर्ष नेताओं, भारतीय मूल के लोगों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया.
उत्सव का उद्घाटन 20 मार्च को मॉरीशस के राष्ट्रपति धरमबीर गोखूल की मौजूदगी में हुआ. इस मौके पर मंत्रियों, संसद सदस्यों, वरिष्ठ अधिकारियों, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों और भारतीय मूल के समुदाय के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए भारत के उच्चायुक्त ने कहा कि बिहार और मॉरीशस के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और भावनात्मक हैं. उन्होंने कहा कि 19वीं सदी में मॉरीशस आए गिरमिटिया मजदूरों का बड़ा हिस्सा बिहार के भोजपुरी भाषी इलाकों से था, जिनकी भाषा और परंपराएं आज भी मॉरीशस की पहचान का हिस्सा हैं.
उन्होंने कहा कि बिहार भारत की सभ्यता और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. भगवान बुद्ध को यहीं ज्ञान प्राप्त हुआ, भगवान महावीर का जन्म यहीं हुआ और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय भी इसी भूमि पर स्थापित था. उन्होंने कहा कि भोजपुरी भाषा और संस्कृति आज भी मॉरीशस में जीवंत है, जो दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों का प्रतीक है.
तीन दिन तक चले इस उत्सव में बिहार की संस्कृति, कला और परंपरा की झलक देखने को मिली. कार्यक्रम में लोकनृत्य, गीत-गवई, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, मधुबनी पेंटिंग प्रदर्शनी, भोजपुरी साहित्य प्रदर्शनी, हस्तशिल्प प्रदर्शनी और फिल्मों का प्रदर्शन किया गया.
उत्सव में गिरमिटिया और मांझी: द माउंटेन मैन फिल्में भी दिखाई गईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा.
खाने के स्टॉलों पर लिट्टी-चोखा, चूड़ा-घुगनी, दाल-पीठा और पारंपरिक मिठाइयों ने लोगों को खास तौर पर आकर्षित किया. बड़ी संख्या में लोगों ने बिहार के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया.
उत्सव के दौरान भोजपुरी साहित्य सम्मेलन भी आयोजित किया गया, जिसमें 80 से अधिक कवि, लेखक और कलाकार शामिल हुए. “बिहार से मॉरीशस तक: एक सांस्कृतिक यात्रा” नामक भोजपुरी नाटक का मंचन किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया. मधुबनी पेंटिंग कार्यशाला और कला-भोजन प्रतियोगिताओं में युवाओं की खास भागीदारी देखने को मिली.
समापन समारोह 22 मार्च को आयोजित हुआ, जिसमें मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस अवसर पर उच्चायुक्त ने कहा कि यह उत्सव केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि बिहार और मॉरीशस के लोगों के साझा इतिहास और पहचान का उत्सव है. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करेंगे.
इस अवसर पर बिहार सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल भी मॉरीशस पहुंचा, जिसमें कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार, बिहार पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंद किशोर, कलाकार और मधुबनी चित्रकार शामिल थे. प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने को लेकर कई बैठकों में भाग लिया.
उत्सव के दौरान पर्यटन प्रोत्साहन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें व्यापार जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और बिहार को पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देने पर चर्चा हुई. प्रतिनिधिमंडल ने महात्मा गांधी संस्थान, आप्रवासी घाट और अन्य विश्व धरोहर स्थलों का भी दौरा किया.
तीन दिन तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में युवाओं, कलाकारों, लेखकों और भारतीय मूल के लोगों ने भाग लिया. भारत के उच्चायोग ने कहा कि बिहार उत्सव 2026 का उद्देश्य भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना है.
-भारत एक्सप्रेस
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