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ईरान का वो डेथ ट्रैप जहां बेबस है अमेरिकी नेवी! जानें क्यों होर्मुज का ताला खोलना ट्रंप के लिए है सबसे बड़ी चुनौती

Trump challenge In Hormuz Strait: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का आज 27वां दिन है. इस युद्ध की वजह से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है. होर्मुज स्ट्रेट से पूरी दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती है. भारत के लिहाज से तो यह इलाका और अहम हो जाता है. भारत अपनी 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है. आयात होने वाले एलपीजी का 60 प्रतिशत से ज्यादा इसी रास्ते से भारत आता है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से दुनिया में तेल और गैस की किल्लत हो गई है. तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर चुकी है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वो इस समुद्री रास्ते को दोबारा खोलेंगे. इसके लिए उन्होंने दुनिया के कई देशों से मदद की मांग की है. तो सवाल ये उठता है कि क्या ट्रंप के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोलना क्या इतना आसान है. और सवाल ये भी है कि आगे क्या रास्ता है?

डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वो होर्मुज स्ट्रेट को किसी भी तरह फिर से खोलेंगे. लेकिन एक्सपर्ट्स उनके इस बयान से इत्तेफाक नहीं रखते. उनका कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं होता है या अमेरिका कोई बड़ा मिलिट्री एक्शन नहीं लेता, तो इसे खोलना नामुमकिन है.

ईरान क्यों है इतना मजबूत?

अमेरिका-इजरायल के जबरदस्त हमले के बाद भी ईरान अभी तक घुटनों पर नहीं आया है. ईरान की इस इलाके में इतनी मजबूती का कारण यहां का भौगोलिक स्थिति है. होर्मुज स्ट्रेट काफी उथला इलाका है. किसी भी शिप को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए उन्हें ईरान के पहाड़ी तटों के करीब से गुजरना होता है. ईरान इसी का फायदा उठाता है.

होर्मुज स्ट्रेट से पूरी दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती है.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के पास कई ऐसे छोटे हथियार हैं, जिनकी मदद से ईरान अचानक वहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमले कर देता है. इस हमले पर प्रतिक्रिया देने के लिए किसी भी सेना के पास काफी कम समय होता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इलाका इतना संकरा है कि यहां से अमेरिकी जहाज भी सुरक्षित नहीं निकल सकते. ईरान के ड्रोन और मिसाइल से बचाव के लिए अमेरिका के लिए भी मुश्किल है.

समुद्र में बिछा रखी है माइंस

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इलाके में समुद्री माइंस बिछा रखी है. जो वहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए सबसे बड़ा खतरा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वो इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों के लिए एस्कॉर्ट का काम कर सकते हैं, लेकिन यह इतना आसान नहीं है. समुद्र में बिछी माइंस को हटाने का काम बहुत ही धीमा होता है. ऐसा करने में कई महीने लग सकते हैं. इसके अलावा ईरान की इतनी बड़ी आर्मी के सामने उसके इलाके में घुसना काफी मुश्किल है.

ट्रंप क्या कर रहे हैं?

डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार इस इलाके को खोलने का दावा कर चुके हैं. उन्होंने कई बार कहा है कि वो इस इलाके पर ईरान के साथ मिलकर कंट्रोल करेंगे, लेकिन यह इतना आसान नहीं है.

अगर ट्रंप ईरान के हाथ से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को छिनना चाहते हैं, तो उन्हें इसके लिए ईरान की मिलिट्री क्षमता को पूरी तरह खत्म करना होगा. उसके मिसाइल सिस्टम, ड्रोन्स और सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट करना होगा. इन्हीं की मदद से ईरान जहाजों पर हमला करता है.

ये भी पढ़ें- हॉर्मुज से लेकर न्यूक्लियर तक, सीजफायर प्रस्ताव के लिए ट्रंप की ईरान को 15 शर्तें

अभी कैसे हैं हालात?

फारस की खाड़ी में इस समय कम से कम 500 से ज्यादा तेल के टैंकर खड़े हैं. ईरान के चलते ये आगे नहीं बढ़ रहे हैं. बीबीसी के मुताबिक युद्ध से पहले इस रास्ते से हर दिन करीब 100 टैंकर गुजरते थे. अगर इस मामले को लेकर ईरान के साथ जबतक कोई समझौता नहीं होता और सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती, तबतक कोई भी जहाज मालिक और बीमा कंपनियां अपनी जहाजों को इस इलाके में भेजने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं होंगी. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईरान का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, तबतक इस इलाके में सामान्य स्थिति बहाल करना मुश्किल है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

गोविंद सिंह बिहार के कैमूर जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हासिल की और पटना कॉलेज, पटना से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, कंटेंट एडिटिंग, रिसर्च और न्यूज प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया। फिलहाल वह भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस विदेश नीति, राष्ट्रीय राजनीति और बिहार से जुड़े मुद्दों पर है।

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