पीटर नवारो के बयान
Peter Navarro controversial statements: भारत पर डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ (Donald Trump Tariffs) को लेकर इन दिनों दुनिया में बहस छिड़ी हुई है. इस बात की गर्मी इसलिए भी और ज्यादा बढ़ गई है क्योंकि, पीएम मोदी ने हाल ही में जापान और चीन का दौरा किया है. इस दौरान भारत को दुनियाभर के देशों का जमकर समर्थन मिला है. हिंदुस्तान में अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ आक्रोश है. इसे बढ़ाने का काम उनके टैरिफ सलाहकार पीटर नवारो ने कर दिया है. इसे लेकर अब वो भी ट्रंप के साथ निशाने पर आ गए हैं.
डेविड नवारो ने अमेरिका के टौरिफ का बचाव करते हुए ब्राह्मण शब्द का उपयोग कर भारतीय समाज को निशाने पर लिया है. इससे अमेरिका की सोच पर सवाल उठने लगा है. हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं है अपने देश की किरकिरी कराने का पीटर नवारो का पुराना इतिहास रहा है. आइये जानें उनके कुछ बयानों के बारे में कि कब उन्होंने क्या किया?
कुछ समय पहले नवारो ने ब्लूमबर्ग टीवी के इंटरव्यू दिया था. इसमें उन्होंने रूस-यूक्रेन जंग को मोदी की जंग बता दिया था. उन्होंने कहा था कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है. उसके बाद उसे रिफाइन कर बेच रहा है. इससे रूस को पैसे मिल रहे हैं. उन्होंने भारत को सलाह देते हुए कहा था कि भारत तानाशाहों के साथ मिल रहा है.
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1984 में डेविड नवारो ने एक किताब लिखी थी. इसमें उन्होंने खुलकर ग्लोबलाइजेशन और ओपन ट्रेड का समर्थन किया था. चुनाव में वह धार्मिक दक्षिणपंथ की आलोचना करते थे. हालांकि, ट्रंप के आने के साथ ही उनके राग बदल गए. वह उन्होंने ग्लोबलाइजेशन की आलोचना शुरू दी. अब वह अमेरिका की पुरानी औद्योगिक ताकत की बात करते है. अपनी नाकामी का ठीकरा वो चीन पर थोपते हैं.
सास 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद नवारो ने डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव-धांधली के दावों का समर्थन किया. उन्होंने “ग्रीन बे स्वीप” नामक एक योजना को बढ़ावा दिया था. इसका उद्देश्य चुनाव परिणामों को उलटना था. इस मामले में कांग्रेस की अवमानना के लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.
कोरोना महामारी के दौरान डेविड नवारो ने डॉ. एंथोनी फौसी के साथ कई बार बहस की थी. उन्होंने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन जैसी अप्रमाणित दवाओं का बचाव किया और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की आलोचना की. उन्होंने रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) की शुरुआती प्रतिक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि परीक्षण में देरी के कारण उसने देश को निराश किया.
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साफ है कि ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो, अपनी ‘जुबान के तीर’ से न केवल अमेरिका को शर्मसार करते हैं, बल्कि अपनी नीतियों से भी विरोधाभास पैदा करते हैं. उनका इतिहास बताता है कि वो पलटी मारने में भी माहिर हैं. वैश्वीकरण के पुजारी रातोरात आलोचक गए थे. यह उनके सिद्धांतों की कमजोरी को दिखाता है. भारत पर मुनाफाखोरी और ब्राह्मणों के नाम का उपयोग करना यह साबित करता है कि उनके पास तर्कों की कमी है. वहीं कोरोना जैसी महामारी में उनकी लापरवाही बताती है कि खोखली बौद्धिक आवरण देना उनका काम है.
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