देशभर के स्कूली पाठ्यक्रम में ट्रांसजेंडर-समावेशी व्यापक यौन शिक्षा को शामिल करने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और देश के सभी राज्यों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है.
सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है. यह याचिका दिल्ली की वसंत वैली स्कूल की कक्षा 12 वी की छात्रा काव्या मुखर्जी साहा ने दायर की है.
दायर याचिका में कहा गया है कि एनसीईआरटी सहित अन्य किताबों में अभी तक आयु उपयुक्त और ट्रांसजेंडर समावेशी व्यापक यौन शिक्षा को समावेशित नहीं किया गया है. याचिकाकर्ता के मुताबिक जब तक बच्चों को शुरुआती शिक्षा से ही जेंडर संवेदनशीलता और विविधिता की समझ नहीं दी जाएगी, तब तक समाज मे समानता और स्वीकार्यता लाना मुश्किल होगा.
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के बावजूद स्कूलों के पाठ्यक्रम में जेंडर पहचान, जेंडर विविधता और लिंग और जेंडर के बीच के अंतर को लेकर कोई जानकारी नही दी गई है.
याचिकाकर्ता ने पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा की, जिसमें पाया गया कि केरल को छोड़कर सभी जगह ट्रांसजेंडर समावेशी शिक्षा का अभाव है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2024 में एक ऐतिहासिक फैसला दिया था. जिसमें अदालत ने बाल विवाह रोकथाम में यौन शिक्षा की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और पंचायतों में अभियान चलाने पर जोर दिया था.
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-भारचत एक्सप्रेस
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