India LPG ships Pine Gas Jag Vasant Hormuz crisis: पश्चिम एशिया के युद्धग्रस्त माहौल में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक और बड़ी और सुखद खबर सामने आई है. होर्मुज जलडमरूमध्य(Strait of Hormuz) में मचे कोहराम के बीच भारतीय झंडे वाले दो और विशालकाय एलपीजी (LPG) टैंकर, ‘पाइन गैस’ (PINE GAS) और ‘जग वसंत’ (JAG VASANT), सफलतापूर्वक ईरानी घेराबंदी को पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं.
यह सफलता उस समय मिली है जब महज कुछ घंटे पहले पाकिस्तान के एक कंटेनर जहाज को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी देकर वापस लौटने पर मजबूर कर दिया था. भारत की इस कामयाबी ने दुनिया को दिखा दिया है कि युद्ध के मैदान में भी ‘तिरंगे’ की साख और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति का लोहा हर कोई मान रहा है.
भारतीय बेड़े का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाने वाला ‘पाइन गैस’ टैंकर इस समय अरब सागर की लहरों को चीरते हुए 12 नॉट्स की रफ्तार से भारत की ओर बढ़ रहा है. साल 2006 में निर्मित यह 20 साल पुराना अनुभवी जहाज एलपीजी की भारी खेप लेकर आ रहा है. ताजा सैटेलाइट लोकेशन के अनुसार, यह जहाज पूरी तरह सुरक्षित है और 27 मार्च की शाम करीब 8:30 बजे तक भारतीय बंदरगाह पर लंगर डाल सकता है.
खास बात यह है कि इस जहाज ने रेडियो संचार के दौरान खुद को ‘India Ship & Ind Crew’ के रूप में पहचाना, जिसके बाद ईरानी सुरक्षा बलों ने इसे बिना किसी रुकावट के गुजरने का रास्ता दे दिया. यह भारत की उस रणनीतिक स्वायत्तता का परिणाम है, जिसके कारण युद्धरत देश भी भारतीय हितों को चोट पहुँचाने से बच रहे हैं.
भारत की ऊर्जा सप्लाई के लिए दूसरी राहत ‘जग वसंत’ के रूप में आई है जो इस समय भारत के पश्चिमी तट के बेहद करीब पहुँच चुका है. कुवैत के मीना अल अहमदी (Mina Al Ahmadi) पोर्ट से रवाना हुआ यह 230.7 मीटर लंबा और 36.6 मीटर चौड़ा विशालकाय टैंकर करीब 12.1 नॉट्स की स्पीड से अपनी मंजिल की ओर अग्रसर है.
कुछ ही मिनट पहले रिकॉर्ड की गई इसकी (India LPG Ships) लोकेशन बताती है कि जहाज का इंजन पूरी तरह कार्यशील है और यह भारतीय नौसेना के सुरक्षा घेरे (ऑपरेशन संकल्प) की निगरानी में है. कुवैत जैसे महत्वपूर्ण सहयोगी देश से एलपीजी की यह खेप लाना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत है, क्योंकि युद्ध के कारण खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.
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इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा विरोधाभास पाकिस्तान की स्थिति को लेकर है. पाकिस्तान ने पिछले 24 घंटों में ईरान से तीन बार फोन पर मिन्नतें कीं लेकिन उसके जहाज को ‘नो एंट्री’ का बोर्ड दिखा दिया गया. इसके विपरीत भारत ने किसी भी शोर-शराबे के बिना अपने जहाजों को ‘एस्कॉर्ट’ करने की ऐसी व्यवस्था की है कि दुश्मन भी रास्ता देने पर मजबूर है.
पाकिस्तान इसलिए फंस गया क्योंकि वह अमेरिका और ईरान के बीच ‘डबल गेम’ खेल रहा है, जबकि भारत ने अपनी तटस्थता और पुराने ऐतिहासिक संबंधों के जरिए ‘सेफ पैसेज’ सुनिश्चित किया है. भारत की यह कामयाबी दर्शाती है कि जहाँ पाकिस्तान की ‘फोन कूटनीति’ फेल हो गई, वहीं भारत की ‘मैदान कूटनीति’ ने देश के चूल्हे जलते रहने का इंतजाम कर दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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