सिंगापुर में भारत के उच्चायोग की ओर से मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में एक सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने सिंगापुर की वरिष्ठ विदेश और गृह मामलों की राज्य मंत्री सिम ऐन से मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान भारत ने आतंकवाद को लेकर अपने सख्त रुख को स्पष्ट रूप से रखा और यह संदेश दिया कि भारत अब आतंकवाद के किसी भी प्रयास का मुंहतोड़ जवाब देगा.
संजय कुमार झा ने सिंगापुर की ओर से मिले प्रतिनिधियों को बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और आतंक के खिलाफ भारत की नई नीति के बारे में जानकारी दी गई. उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब किसी भी तरह की परमाणु धमकी को बर्दाश्त नहीं करेगा और अगर कोई देश आतंकवाद को बढ़ावा देता है या उसके पीछे खड़ा होता है, तो भारत उसे भी जवाब देगा.
झा ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत की जवाबी कार्रवाई सटीक, संतुलित और जिम्मेदाराना रही है. उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए, 100 से अधिक आतंकवादियों को ढेर किया गया, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे संगठनों से जुड़े आतंकी शामिल थे.
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि पहलगाम हमला जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास के माहौल को बिगाड़ने की एक कोशिश थी. भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि हमले के दोषियों और उसके योजनाकारों को सजा मिलना जरूरी है.
सिंगापुर से इस मुद्दे पर समर्थन मांगते हुए भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक मंचों जैसे संयुक्त राष्ट्र और एफएटीएफ में सिंगापुर का सहयोग चाहता है. उन्होंने दोहराया कि भारत और सिंगापुर घनिष्ठ साझेदार हैं और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करना जारी रखेंगे.
जवाब में, सिंगापुर की वरिष्ठ मंत्री सिम ऐन ने कहा कि सिंगापुर सभी प्रकार के आतंकवाद की निंदा करता है और भारत के साथ खड़ा है. उन्होंने दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई.
इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल थे जिनमें भाजपा की अपराजिता सारंगी और बृजलाल, टीएमसी के अभिषेक बनर्जी, सीपीआई (एम) के जॉन ब्रिटास, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, बीजेपी के प्रदन बरुआ और हेमांग जोशी तथा मोहान कुमार भी शामिल थे.
बता दें कि मोदी सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद कूटनीतिक स्तर पर बड़ा कदम उठाते हुए सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों का गठन किया है, जिनका उद्देश्य विभिन्न देशों को पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क और भारत की आतंक के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति से अवगत कराना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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