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बेनकाब हुआ ईरान! जंग की आग में झोंके बच्चे; कितने सुरक्षित बाल अधिकार? उड़ी UN कन्वेंशन की धज्जियां

Iran Child Recruitment Controversy: जब बात दूसरों पर उंगली उठाने की होती है, तो ईरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सबसे ऊंची आवाज में बोलता है. इस जंग की शुरुआत से ही ईरान ने विरोधी देशों पर ‘वार क्राइम’ (War Crime) का आरोप लगाया, स्कूलों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और दुनिया भर से इसे नियमों का खुला उल्लंघन बताकर कार्रवाई की मांग की. लेकिन जब बात अपने ही घर की आई, तो ईरान के सारे आदर्श हवा हो गए.

12 साल के बच्चे बने सैनिक (children rights in iran)

जिस ईरान ने बाल अधिकारों पर ‘संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन’ (Convention on the Rights of the Child) पर बड़े गर्व से हस्ताक्षर किए थे, आज वही देश 12 साल के मासूम बच्चों को युद्ध की आग में धकेल रहा है. UN का यह कन्वेंशन साफ तौर पर सैन्य गतिविधियों में बच्चों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाता है. लेकिन ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस अंतरराष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाते हुए युद्ध और सुरक्षा कार्यों के लिए न्यूनतम आयु सीमा घटाकर 12 वर्ष कर दी है.

स्कूल बैग की जगह थमा दी सबमशीन गन (iran human rights violation)

ईरान सरकार इसे ‘मातृभूमि रक्षक’ या वॉलंटियर प्रोग्राम का नाम देकर अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत रोंगटे खड़े करने वाली है. जिन 12-13 साल के बच्चों के हाथों में किताबें और स्कूल बैग होना चाहिए था, वे आज राजधानी तेहरान की सड़कों पर मशीनगन ताने खड़े हैं. स्थानीय लोगों ने खुद पुष्टि की है कि इन मासूमों को चेकपॉइंट्स पर वाहनों की जांच करने और हथियारों के साथ पहरा देने का काम सौंपा गया है.

अधिकारों का हनन या तबाही की तैयारी? (iran military child recruitment)

IRGC के अधिकारी रहीम नदाली का तर्क है कि बच्चे खुद युद्ध में शामिल होना चाहते हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या एक 12 साल का बच्चा युद्ध की विभीषिका और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को समझता है? दुनिया को मानवाधिकारों और वॉर क्राइम पर ज्ञान देने वाला ईरान आज खुद इस बात का उदाहरण बन गया है कि उसके राज में बच्चों के अधिकार कितने सुरक्षित हैं. अपने 10 लाख लड़ाकों की फौज के बीच इन छोटे बच्चों को ढाल बनाकर खड़ा करना, ईरान के दोहरे चरित्र को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब करता है.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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