US Iran War Tension: ईरान में पिछले छह दिनों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं. गिरती अर्थव्यवस्था और कट्टरपंथी शासन के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है. हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि प्रदर्शनकारियों ने हमादान में रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के बेस पर कब्जे का दावा किया है. सुरक्षाबलों और आम नागरिकों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है. डर के साये में सरकार ने ठंड और एनर्जी सेविंग का बहाना बनाकर देशभर में स्कूल-कॉलेज और सरकारी संस्थान बंद कर दिए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा बल प्रयोग किया गया, तो अमेरिका दखल देगा. इसके जवाब में ईरान ने खुली धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने कोई भी आक्रामक कदम उठाया, तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने उनके लिए वैध टारगेट होंगे.
तेहरान से शुरू हुई यह चिंगारी अब देश के कोने-कोने में फैल चुकी है. हमादान के असदाबाद में प्रदर्शनकारियों ने अयातुल्ला खामेनेई की सबसे ताकतवर फौज, ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के बेस पर कब्जा करने का दावा किया है. पिछले 48 घंटों में हिंसा तेज हुई है और सुरक्षाबलों द्वारा भीड़ को तितर-बितर करने के दौरान कई जगहों पर गोलीबारी की खबरें हैं. लोग सरेआम सुप्रीम लीडर खामेनेई के खिलाफ तानाशाह मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं और राजशाही (शाह रजा पहलवी) की वापसी की मांग कर रहे हैं.
इस पूरे विद्रोह की जड़ ईरान की बर्बाद हो चुकी अर्थव्यवस्था है. महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है और मुद्रा का अवमूल्यन ऐतिहासिक निचले स्तर पर है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मुद्रास्फीति 42.5% तक पहुंच गई है. एक अमेरिकी डॉलर की कीमत अब ईरान में करीब 14 लाख रियाल हो गई है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने खुद माना है कि उनके हाथ बंधे हुए हैं. उन्होंने कहा की समस्या हल नहीं कर पाए, तो हम नर्क में जाएंगे. दुकानदार और व्यापारी भी सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं.
ईरान के आंतरिक मामले अब जिओ-पॉलिटिकल युद्ध का रूप ले रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गईं, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा और दखल देगा. इस पर ईरान भड़क गया है. ईरान की संसद के अध्यक्ष और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अधिकारी अली लारिजानी ने अमेरिका को दो टूक जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि ट्रंप की दखलअंदाजी अमेरिकी हितों के विनाश का कारण बनेगी.
ये भी पढ़ें: वोटिंग से पहले ही BJP का धमाल, महाराष्ट्र में निर्विरोध हासिल की निकाय की 44 सीट
कुल मिलाकर, ईरान इस समय दोहरी मुसीबत में फंसा है. एक तरफ घर के अंदर जनता का विद्रोह उसे खोखला कर रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका के साथ युद्ध की आहट ने शासन की नींद उड़ा दी है. स्कूल बंद करने और इंटरनेट पाबंदियों जैसे कदम सरकार की घबराहट को दर्शा रहे हैं. अगर प्रदर्शन नहीं थमे और अमेरिका ने अपनी धमकी पर अमल किया, तो मध्य-पूर्व में एक और बड़ा संकट खड़ा होना तय है.
India ITME 2026: इंडिया आईटीएमई 2026 इस दिसंबर ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने जा रहा…
Amit Shah targets Arvind Kejriwal: द्वारका में 8,941 करोड़ रुपये के यमुना प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन…
गाजियाबाद के सनसिटी में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित विश्व के सबसे बड़े…
Shiva Sharma Death Case: लखनऊ के कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में मॉडल…
Khargone Illegal Weapons: खरगोन पुलिस ने कसरावद रोड पर कार से 14 अवैध देसी पिस्टल…
Tiger Shroff Firing Case: टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में मुंबई के अंधेरी स्थित होटल के…