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खतरे में खामेनेई की कुर्सी? ईरान में ‘गृहयुद्ध’ जैसे हालात, सड़कों पर ‘तानाशाह मुर्दाबाद’

US Iran War Tension: ईरान की सड़कों पर खून बह रहा है और अर्थव्यवस्था दम तोड़ चुकी है, लेकिन असली खतरा सीमाओं के बाहर मंडरा रहा है. जनता अपने ही सुप्रीम लीडर को ‘मौत’ की दुआएं दे रही है, तो उधर ईरान ने अमेरिका को ऐसी धमकी दी है जिससे पूरा मध्य-पूर्व हिल सकता है.

Iran Unrest Anti Khamenei Protest US Bases After Donald Trump Warning

US Iran War Tension: ईरान में पिछले छह दिनों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं. गिरती अर्थव्यवस्था और कट्टरपंथी शासन के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है. हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि प्रदर्शनकारियों ने हमादान में रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के बेस पर कब्जे का दावा किया है. सुरक्षाबलों और आम नागरिकों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है. डर के साये में सरकार ने ठंड और एनर्जी सेविंग का बहाना बनाकर देशभर में स्कूल-कॉलेज और सरकारी संस्थान बंद कर दिए हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा बल प्रयोग किया गया, तो अमेरिका दखल देगा. इसके जवाब में ईरान ने खुली धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने कोई भी आक्रामक कदम उठाया, तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने उनके लिए वैध टारगेट होंगे.

विस्तार से ईरान संकट (Iran Protest)

तेहरान से शुरू हुई यह चिंगारी अब देश के कोने-कोने में फैल चुकी है. हमादान के असदाबाद में प्रदर्शनकारियों ने अयातुल्ला खामेनेई की सबसे ताकतवर फौज, ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के बेस पर कब्जा करने का दावा किया है. पिछले 48 घंटों में हिंसा तेज हुई है और सुरक्षाबलों द्वारा भीड़ को तितर-बितर करने के दौरान कई जगहों पर गोलीबारी की खबरें हैं. लोग सरेआम सुप्रीम लीडर खामेनेई के खिलाफ तानाशाह मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं और राजशाही (शाह रजा पहलवी) की वापसी की मांग कर रहे हैं.

  • बीते 2 दिनों में हिंसा में 7 लोगों की मौत
  • हमादान में सैन्य बेस पर प्रदर्शनकारियों के कब्जे का दावा
  • स्कूल और यूनिवर्सिटीज को अनिश्चितकाल के लिए बंद किया गया

अर्थव्यवस्था हो गई ध्वस्त (Anti Khamenei Protest In Iran)

इस पूरे विद्रोह की जड़ ईरान की बर्बाद हो चुकी अर्थव्यवस्था है. महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है और मुद्रा का अवमूल्यन ऐतिहासिक निचले स्तर पर है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मुद्रास्फीति 42.5% तक पहुंच गई है. एक अमेरिकी डॉलर की कीमत अब ईरान में करीब 14 लाख रियाल हो गई है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने खुद माना है कि उनके हाथ बंधे हुए हैं. उन्होंने कहा की समस्या हल नहीं कर पाए, तो हम नर्क में जाएंगे. दुकानदार और व्यापारी भी सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं.

  • ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ में ऐतिहासिक गिरावट
  • महंगाई दर 42.5% के पार, खाने-पीने की चीजों के लाले
  • राष्ट्रपति ने मानी सरकार की विफलता, हालात को बताया ‘नर्क’ समान

अमेरिका बनाम ईरान

ईरान के आंतरिक मामले अब जिओ-पॉलिटिकल युद्ध का रूप ले रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गईं, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा और दखल देगा. इस पर ईरान भड़क गया है. ईरान की संसद के अध्यक्ष और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अधिकारी अली लारिजानी ने अमेरिका को दो टूक जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि ट्रंप की दखलअंदाजी अमेरिकी हितों के विनाश का कारण बनेगी.

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कुल मिलाकर, ईरान इस समय दोहरी मुसीबत में फंसा है. एक तरफ घर के अंदर जनता का विद्रोह उसे खोखला कर रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका के साथ युद्ध की आहट ने शासन की नींद उड़ा दी है. स्कूल बंद करने और इंटरनेट पाबंदियों जैसे कदम सरकार की घबराहट को दर्शा रहे हैं. अगर प्रदर्शन नहीं थमे और अमेरिका ने अपनी धमकी पर अमल किया, तो मध्य-पूर्व में एक और बड़ा संकट खड़ा होना तय है.



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