Iran US Tensions
Iran US Tensions: ईरान-अमेरिका के बीच जंग को खत्म करने के लिए इस्लामाबाद में फिर दूसरे दौर की बैठक होने वाली है. इसी बीच ईरान ने अमेरिकी नाकेबंदी पर कड़ा रूख अपना लिया है. ईरानी मीडिया के मुताबिक ईरानी सरकार ने अपने प्रतिनिधियों को पहले वहां भेजने से इनकार कर दिया है.
ईरानी मीडिया ने सरकार के हवाले से दावा किया है कि जबतक अमेरिका ईरान पर अपना नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखेगा. तबतक उनका डेलिगेशन पाकिस्तान में बातचीत के लिए नहीं भेजा जाएगा.
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सरकार को डील करने की धमकी दी थी. जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के पास यह बातचीत का आखिरी मौका है. अगर ईरान कोई समझौता नहीं करता है तो फिर अमेरिका और ईरान के बीच हुआ सीजफायर फिर टूट सकता है. इसके बाद अमेरिकी सेना ईरान के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर देगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक अमेरिकी डेलिगेशन सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचेगा.
हालांकि पिछली बार की तरह इस बार के डेलिगेशन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस नहीं जा रहे हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि वेंस 11-12 अप्रैल को ईरान से बातचीत करने जाने वाले डेलिगेशन का हिस्सा नहीं हैं.
उधर अमेरिकी सरकार पर ईरान ने विश्वासघात का आरोप लगाया है. ईरान का कहना है कि अमेरिका अपने वादों से मुकरा है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने कल फोन पर बातचीत की थी. जिसमें ईरान ने अमेरिका को जमकर खरीखोटी सुनाई. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने सद्भावना का परिचय देते हुए होर्मुज स्ट्रेट खोलने की कोशिश की, लेकिन अमेरिका ने समुद्री घेराबंदी कर ईरान को धोखा दिया है.
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बता दें कि, होर्मुज संकट की वजह से ग्लोबल ऑयल और गैस सप्लाई चेन प्रभावित हुआ है. दुनिया के अधिकतर देश तेल और गैस की किल्लत से जूझ रहे हैं. ऐसे अमेरिका ने इसपर कुछ हद तक मरहम लगाने के लिए आगे आया है. अमेरिकी सरकार ने वैश्विक मार्केट में 2.6 करोड़ बैरल तेल रिलीज किया है.
-भारत एक्सप्रेस
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