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“एक ग्राम यूरेनियम भी नहीं देंगे!” अमेरिका की बड़ी मांग पर ईरान का दोटूक जवाब

Iran US Tensions: ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका या किसी अन्य देश को नहीं सौंपेगा. ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने कहा कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा हैं और उन्हें ईरान कभी स्वीकार नहीं करेगा.

Iran US Tensions

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Iran US Tensions: वेस्ट एशिया में समुद्र में बढ़ते तनाव के साथ-साथ अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका या किसी अन्य देश को नहीं सौंपेगा. ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने कहा कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा हैं और उन्हें ईरान कभी स्वीकार नहीं करेगा. इस बयान ने परमाणु डील पर चल रही बातचीत को और मुश्किल बना दिया है.

वेस्ट एशिया में हालात बिगड़ने का असर कूटनीतिक मोर्चे पर भी पड़ा है. अमेरिका की मांगों को गैरवाजिब बताते हुए ईरान ने उन्हें मानने से इंकार कर दिया है. ईरान ने तय किया है कि वह अमेरिका के मैक्सिमम प्रेशर का जवाब उसी की जुबान में देगा और नाकेबंदी के बदले नाकेबंदी की रणनीति अपनाएगा.

नाकेबंदी का जवाब नाकेबंदी से देगा ईरान

ईरानी संसद के अध्यक्ष गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका की नाकेबंदी का जवाब ईरान भी नाकेबंदी से देगा.

इस बीच ईरान ने संघर्ष में हुए नुकसान के ताज़ा आंकड़े जारी किए हैं. फाउंडेशन ऑफ मार्टियर्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के हमलों में अब तक कम से कम 3 हजार 468 लोग मारे जा चुके हैं. ईरान का यह भी दावा है कि अमेरिका उसकी मिसाइल और हवाई क्षमता को कमजोर करने में नाकाम रहा है. तनाव अब केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहा है. लेबनान और हिजबुल्लाह को भी युद्धविराम की शर्तों में शामिल करने की ईरान की मांग ने इसे क्षेत्रीय विवाद का रूप दे दिया है.

ट्रंप ने ईरान पर ब्लैकमेल करने का लगाया आरोप

उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लगातार चेतावनी दे रहे हैं. ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद करके वह अमेरिका को ब्लैकमेल नहीं कर सकता. उन्होंने धमकी दी कि अगर सीजफायर खत्म होने से पहले कोई समझौता नहीं होता है, तो वह युद्धविराम को समाप्त कर देंगे. साथ ही उन्होंने इजरायल को अमेरिका का महान सहयोगी बताते हुए यह संकेत दिया कि इस युद्ध से अमेरिका-इजरायल की साझेदारी और मजबूत होगी.

युद्ध खत्म नहीं होने तक शांति स्थापित नहीं होगी

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी बयान जारी कर कहा है कि जब तक युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं होता और स्थायी शांति स्थापित नहीं होती, तब तक होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान का कब्जा बना रहेगा. ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने के कारण ईरान ने होर्मुज पर फिर से सख्त नियंत्रण शुरू कर दिया है.

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कूटनीतिक स्तर पर भी हालात ठहरे हुए हैं. ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की बातचीत के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है. इसका मतलब है कि बातचीत और गोलीबारी दोनों साथ-साथ चल रहे हैं, लेकिन किसी ठोस समझौते तक पहुंचने में अभी लंबा सफर बाकी है.

-भारत एक्सप्रेस



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