Jaish-e-Mohammed: प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद अब अपना नाम बदलने की योजना बना रहा है. पाकिस्तान में इसे अब अल-मुराबितुन के नाम से जाना जाएगा. अरबी में इसका मतलब है ‘इस्लाम के रक्षक’. माना जा रहा है कि अगले हफ्ते मसूद अजहर के भाई यूसुफ अजहर के स्मारक में इस नए नाम का इस्तेमाल होगा.
जैश-ए-मोहम्मद भारतीय संसद पर हमले, 26/11 मुंबई हमलों और उरी-पुलवामा हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है. लेकिन अब संगठन पर प्रतिबंध के कारण उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है. एनडीटीवी के अनुसार, नाम बदलने का मुख्य कारण फंडिंग जुटाने में मुश्किल होना है.
वैश्विक आतंकवाद-रोधी संस्था एफएटीएफ की रिपोर्ट में बताया गया है कि संगठन अब डिजिटल भुगतान का सहारा ले रहा है. ई-वॉलेट और यूपीआई ट्रांसफर के जरिए पैसे भेजकर फंडिंग की जा रही है. इससे पता नहीं चल पाता कि किस बैंक खाते से कितना पैसा ट्रांसफर हुआ.
ये भी पढ़ें: Operation Sindoor के बाद PoK को छोड़ PAK में अब यहां ठिकाना बना रहे जैश और हिजबुल के आतंकवादी, इंटेलिजेंस ने खोली पोल
एफएटीएफ ने अब तक पांच डिजिटल वॉलेट की पहचान की है. इनमें ज्यादातर का संबंध सीधे मसूद अजहर के परिवार या संगठन के सदस्यों से है. रिपोर्ट के अनुसार, जैश का उद्देश्य लगभग 4 अरब पाकिस्तानी रुपये जुटाकर 300 से अधिक प्रशिक्षण केंद्र खोलना है.
डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल पाकिस्तान के लिए भी फायदेमंद है. वह कह सकता है कि अब बैंक ट्रांसफर बंद कर दिया गया है और एफएटीएफ नियमों का पालन हो रहा है. लेकिन रिपोर्ट बताती है कि जैश को अब भी फंडिंग जारी है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
केंद्र सरकार ने 5 अक्टूबर 2026 को दिल्ली, गुजरात और तेलंगाना हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य…
ग्वालियर में 20 रुपये के मोमोज की संख्या कम होने पर सवाल पूछना एक छात्र…
नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विंटर शेड्यूल से पहले सस्ती बसों, ऐप टैक्सियों और फ्री…
उमेश पाल ट्रिपल मर्डर केस के 5 लाख के इनामी आरोपी अरमान बिहारी को प्रयागराज…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन को भारत की समृद्ध विरासत और…
सोशल मीडिया पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के नाम से एक…