G7 Summit 2026
G7 Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz के साथ हुई मुलाकात को बेहद सकारात्मक बताया. दोनों नेताओं के बीच भारत और जर्मनी के द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने पर विस्तृत चर्चा हुई. बातचीत का केंद्र व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, सूचना प्रौद्योगिकी, हरित विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र रहे.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच संबंध केवल आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार और सतत विकास के साझा दृष्टिकोण से भी जुड़े हुए हैं. बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देश आपसी सहयोग को और मजबूत बनाकर नई संभावनाओं का लाभ उठा सकते हैं.
जर्मन और भारतीय कंपनियों के बीच सहयोग पर चर्चा
व्यापार और निवेश के क्षेत्र में दोनों नेताओं ने भारतीय और जर्मन कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. जर्मनी लंबे समय से भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल रहा है और भारत में ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, विनिर्माण तथा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में जर्मन निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. दोनों पक्षों ने औद्योगिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाने पर भी विचार-विमर्श किया.
बैठक में सर्कुलर इकोनॉमी यानी संसाधनों के अधिकतम पुनः उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया. जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण की वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए भारत और जर्मनी स्वच्छ ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी तथा टिकाऊ विकास के क्षेत्रों में साझेदारी को और व्यापक बनाने के इच्छुक हैं.
दोनों नेताओं ने रक्षा क्षेत्र पर भी की चर्चा
रक्षा सहयोग भी वार्ता का एक महत्वपूर्ण विषय रहा. दोनों नेताओं ने रक्षा उत्पादन, तकनीकी सहयोग और सामरिक साझेदारी को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा की. बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत और जर्मनी दोनों ही नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और स्थिरता के पक्षधर हैं, जिसके कारण रक्षा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं.
सूचना प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने साझा कार्ययोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई. भारत की डिजिटल क्षमता और जर्मनी की उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता को मिलाकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन, कौशल विकास और अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं.
इसके अलावा दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया. छात्र विनिमय कार्यक्रमों, अकादमिक सहयोग, पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा हुई. इससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी समझ और विश्वास को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
दोनों देशों के बीच की पृष्ठभूमि
भारत और Germany के संबंध पिछले कई दशकों में लगातार मजबूत हुए हैं. वर्ष 2000 में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत हुई थी, जिसे समय के साथ और व्यापक बनाया गया. जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार माना जाता है, जबकि भारत जर्मनी के लिए एशिया में एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक सहयोगी है. दोनों देश जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, कौशल विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा वैश्विक शासन सुधार जैसे मुद्दों पर भी निकटता से सहयोग करते रहे हैं.
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जी-7 सम्मेलन के अवसर पर हुई यह मुलाकात इस बात का संकेत है कि भारत और जर्मनी आने वाले वर्षों में अपनी साझेदारी को और अधिक व्यापक, आधुनिक और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. दोनों देशों का लक्ष्य आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और वैश्विक स्थिरता के क्षेत्र में मिलकर काम करते हुए नई संभावनाओं का सृजन करना है.
-भारत एक्सप्रेस
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