ब्रिटेन में न्यूकैसल यूनिवर्सिटी (Newcastle University) के वैज्ञानिकों ने तीन-पैरेंट्स आईवीएफ (Three-Person IVF) तकनीक से माइटोकॉन्ड्रियल डोनेशन द्वारा आठ स्वस्थ बच्चे जन्म दिए हैं, जिससे आनुवंशिक और माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (Mitochondrial DNA) से जुड़ी लाइलाज बीमारियों (Inherited Diseases) को रोका जा सका, यह प्रजनन चिकित्सा (Reproductive Medicine) में एक बड़ा मेडिकल ब्रेकथ्रू है।
ब्रिटेन ने विज्ञान की दुनिया में ऐसा चमत्कार कर दिखाया है, जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. वहां अब तक आठ ऐसे बच्चे जन्म ले चुके हैं, जिनके डीएनए (DNA) में तीन लोगों का योगदान है. मां, पिता और एक महिला डोनर. इसका मकसद है माइटोकॉन्ड्रियल बीमारियों से ग्रसित बच्चों को स्वस्थ जीवन देना.
यह सब संभव न्यूकैसल यूनिवर्सिटी (UK) और मोनाश यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया) के वैज्ञानिकों की मेहनत से हुआ है. उन्होंने एक नई आईवीएफ (IVF) तकनीक तैयार की है जिसमें मां के अंडाणु, पिता के शुक्राणु और डोनर महिला से स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए लिया जाता है. इससे बच्चों में आनुवंशिक बीमारी के खतरे को लगभग पूरी तरह मिटा दिया जाता है.
माइटोकॉन्ड्रियल बीमारियां दुर्लभ जरूर हैं, लेकिन बेहद गंभीर होती हैं. दृष्टि हानि, मांसपेशियों का क्षय और अंगों की विफलता जैसी समस्याएं पैदा करती हैं. हर 5,000 बच्चों में से एक इस बीमारी का शिकार होता है. चूंकि इसका कोई इलाज नहीं है. यह तकनीक इन परिवारों के लिए जीवन-रक्षक साबित हो रही है.
न्यूकैसल फर्टिलिटी सेंटर में 22 महिलाओं ने इस तकनीक से इलाज करवाया और अब उनमें से आठ के बच्चे जन्म ले चुके हैं. जिसमें चार लड़के और चार लड़कियां हैं. छह बच्चों में म्यूटेटेड डीएनए (Mutated DNA) लगभग पूरी तरह खत्म हो गया है और दो में यह बीमारी की सीमा से काफी नीचे है.
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हालांकि यह तकनीक कई देशों में विवादों में है. अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों ने अभी इसे मंजूरी नहीं दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे “डिज़ाइनर बेबीज़” बनाने का रास्ता खुल सकता है और भ्रूण नष्ट होने के नैतिक सवाल भी उठते हैं.
लेकिन जिन परिवारों को माइटोकॉन्ड्रियल बीमारी का डर सता रहा था उनके लिए यह एक वरदान बनकर आई है. तीन डीएनए (DNA) वाले ये बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं और आने वाले वर्षों में उनकी स्थिति पर निगरानी रखी जाएगी. यह तकनीक भविष्य के लिए एक नई उम्मीद है जहां जेनेटिक्स सिर्फ बीमारी रोकने का माध्यम ही नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने का जरिया भी हो सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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