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मुस्लिम उम्माह का ‘चूरन’ बेचता रहा पाकिस्तान, जरूरत पड़ने पर सऊदी को दिया दगा? जानें क्यों बैकफुट पर आया इस्लामाबाद

Pakistan Saudi Arabia Relations: मध्य पूर्व में अपनी रणनीतिक पहुंच बनाने के लिए पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब को मुस्लिम उम्माह का चूरन देता रहा है. पाकिस्तान कई मौकों पर सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहरा चुका है. लेकिन अब जब यमन में हूतियों ने सऊदी अरब पर हमला किया तो पाकिस्तान सुरक्षा देने से पीछे हट गया. जिसके बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए ‘मक्का पैक’ पर सवाल उठ रहे हैं.

सवाल अब यह है कि आखिर क्यों पाकिस्तान ने सऊदी अरब से रणनीतिक और राजनीतिक रिश्तों का फायदा तो लिया, लेकिन जब सऊदी को सच में सुरक्षा की जरूरत पड़ी तो पीछे हट गया.

किये थे बड़े-बड़े वादे

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा संबंधों को हमेशा रणनीतिक साझेदारी के तौर पर पेश किया गया है. दोनों देशों के बीच हालिया रक्षा समझौतों ने भी सुरक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने का दावा किया. लेकिन हूतियों के हमलों के बाद तस्वीर अलग दिखाई दे रही है. पाकिस्तान सऊदी की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता तो दोहरा रहा है, मगर सैन्य कार्रवाई की बात आते ही बातचीत की बात कर रहा.

पाकिस्तान की राजनीति और विदेश नीति में मुस्लिम उम्माह का मुद्दा हमेशा महत्वपूर्ण रहा है. पाकिस्तान हमेशा से खुद को मुस्लिम देशों की सबसे बड़ी ताकत के रूप में पेश करता रहा है. लेकिन अब जब सऊदी की मदद की बारी आई तो पीछे हट गया.

सऊदी अरब को हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ रहा है. अब पाकिस्तान के सामने अपने ही दावों को साबित करने की चुनौती है. वह एक तरफ रियाद के साथ खड़े होने की बात करता है, दूसरी तरफ सैन्य टकराव से दूरी बनाए रखता है.

पैदा हुआ ‘धोखे’ का सवाल

सऊदी से दोस्ती का इस्तेमाल पाकिस्तान ने अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए किया. क्योंकि सऊदी अरब लंबे समय से पाकिस्तान का महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार रहा है. पाकिस्तान के आर्थिक संकट के दौर में रियाद की मदद और निवेश की भूमिका भी रही है. ऐसे में बीच जंग में पाकिस्तान का सऊदी का साथ छोड़ना कहीं ना कहीं दोनों देशों के संबंधों पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है.

पाकिस्तान के मौजूदा रुख को उसके रणनीतिक हितों से जोड़कर भी देखा जा सकता है. ईरान उसका पड़ोसी है और हूतियों के ईरान के साथ संबंध हैं. सीधे सैन्य संघर्ष में उतरने से पाकिस्तान को क्षेत्रीय तनाव का सामना करना पड़ सकता है. जो कि पाकिस्तान बिल्कुल भी नहीं चाहता.

ये भी पढ़ें- ईरान युद्ध में अमेरिका को ₹4.18 लाख करोड़ का फटका, अब सऊदी से कर रहा वसूली

सऊदी को पाकिस्तान ने दोस्ती का भरोसा दिया और रक्षा साझेदारी की, और इसी को लेकर अरबों डॉलर वसूल लिये. लेकिन जब हूतियों के हमले हुए तो पाकिस्तान सैन्य जवाब के बजाय बातचीत का संदेश दे रहा है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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