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US Saudi Arabia Weapons Deal: कहते हैं कि युद्ध कभी किसी का भला नहीं करता, लेकिन डिफेंस इंडस्ट्री के कारोबार में गणित कुछ अलग ही तरीके से चलता है. ईरान के साथ जारी जंग में अमेरिका को अब तक 43.6 अरब डॉलर (करीब 4.18 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम आर्थिक झटका लग चुका है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ जहां जंग में अमेरिका का खजाना खाली हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह सऊदी अरब को भारी मात्रा में हथियार बेचकर इस घाटे की भरपाई करने की जुगत में दिख रहा है.
जनवरी से लेकर सितंबर 2026 के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ करीब 44 अरब डॉलर, यानी लगभग ₹4.22 लाख करोड़ के संभावित हथियार सौदों को मंजूरी दी है.
अमेरिका को हर महीने हजारों करोड़ का फटका
पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ पर अमेरिका का अब तक का अनुमानित खर्च 43.6 अरब डॉलर पहुंच चुका है. इसमें से करीब ₹1.07 लाख करोड़ सीधे सैन्य ऑपरेशन्स पर खर्च हो चुके हैं, जबकि हथियारों के खाली हुए स्टॉक को फिर से भरने में ही ₹2.69 लाख करोड़ की रकम लगेगी.
किस सेना का कितना खर्च: इस जंग में सबसे बड़ा बोझ अमेरिकी वायुसेना (Air Force) पर पड़ा है, जिसका खर्च करीब ₹63,438 करोड़ रहा. वहीं नेवी का खर्च ₹21,252 करोड़ और आर्मी का खर्च ₹15,151 करोड़ आंका गया है.
आम अमेरिकी पर मार: जंग के खर्च का असर अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है. अगस्त में वहां महंगाई दर बढ़कर 3.4% पहुंच गई है. पेट्रोल 4.33 डॉलर प्रति गैलन और डीजल 6 डॉलर के पार बिक रहा है.
सऊदी अरब को बेचे जा रहे अत्याधुनिक हथियार
ईरान से बढ़ते तनाव और हूती विद्रोहियों के हमलों को देखते हुए सऊदी अरब भी अपनी सुरक्षा मजबूत करने में जुटा है. इसी का फायदा उठाकर वाशिंगटन ने रियाद के साथ एक के बाद एक कई बड़े रक्षा सौदे किए हैं:
| तारीख | हथियार / डिफेंस डील | अनुमानित कीमत |
| 30 जनवरी 2026 | PAC-3 पैट्रियट मिसाइलें | ₹86,346 करोड़ |
| 3 फरवरी 2026 | F-15 फाइटर जेट मेंटेनेंस | ₹28,782 करोड़ |
| जुलाई 2026 | APKWS-II हथियार प्रणाली | ₹18,804 करोड़ |
| 4 सितंबर 2026 | JDAM-ER किट और AGT-1500 इंजन | ₹55,165.5 करोड़ |
| 17 सितंबर 2026 | 48 F-35 लड़ाकू विमान + 49 इंजन | ₹2,33,134 करोड़ |
रिपोर्ट के अनुसार
कागज पर हिसाब बराबर
अगर आंकड़ों पर गौर करें तो ईरान जंग में अमेरिका का खर्च (₹4.18 लाख करोड़) और सऊदी अरब को मंजूर हुए हथियार सौदों की रकम (₹4.22 लाख करोड़) लगभग बराबर दिखती है.
हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसे सीधी वसूली कहना थोड़ा जल्दबाजी होगा, क्योंकि ये संभावित बिक्री हैं और इनका भुगतान लंबे समय में होगा. लेकिन इतना तय है कि इन रक्षा सौदों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाने के लिए एक बड़ा लाइफलाइन जरूर दे दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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