ईरान के खौफ में पाकिस्तान ने बीच मंझधार में सऊदी अरब को छोड़ा
Pakistan Saudi Arabia Relations: मध्य पूर्व में अपनी रणनीतिक पहुंच बनाने के लिए पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब को मुस्लिम उम्माह का चूरन देता रहा है. पाकिस्तान कई मौकों पर सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहरा चुका है. लेकिन अब जब यमन में हूतियों ने सऊदी अरब पर हमला किया तो पाकिस्तान सुरक्षा देने से पीछे हट गया. जिसके बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए ‘मक्का पैक’ पर सवाल उठ रहे हैं.
सवाल अब यह है कि आखिर क्यों पाकिस्तान ने सऊदी अरब से रणनीतिक और राजनीतिक रिश्तों का फायदा तो लिया, लेकिन जब सऊदी को सच में सुरक्षा की जरूरत पड़ी तो पीछे हट गया.
किये थे बड़े-बड़े वादे
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा संबंधों को हमेशा रणनीतिक साझेदारी के तौर पर पेश किया गया है. दोनों देशों के बीच हालिया रक्षा समझौतों ने भी सुरक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने का दावा किया. लेकिन हूतियों के हमलों के बाद तस्वीर अलग दिखाई दे रही है. पाकिस्तान सऊदी की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता तो दोहरा रहा है, मगर सैन्य कार्रवाई की बात आते ही बातचीत की बात कर रहा.
A massive plume of smoke is rising from King Khalid Airport in Riyadh, Saudi Arabia, following a Houthi ballistic missile attack on the capital.
A fuel depot and cargo buildings were likely hit and are currently burning. pic.twitter.com/LrLvyhOc8b
— MoloMonitor 🇮🇹 (@MoloWarMonitor) September 19, 2026
पाकिस्तान की राजनीति और विदेश नीति में मुस्लिम उम्माह का मुद्दा हमेशा महत्वपूर्ण रहा है. पाकिस्तान हमेशा से खुद को मुस्लिम देशों की सबसे बड़ी ताकत के रूप में पेश करता रहा है. लेकिन अब जब सऊदी की मदद की बारी आई तो पीछे हट गया.
सऊदी अरब को हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ रहा है. अब पाकिस्तान के सामने अपने ही दावों को साबित करने की चुनौती है. वह एक तरफ रियाद के साथ खड़े होने की बात करता है, दूसरी तरफ सैन्य टकराव से दूरी बनाए रखता है.
पैदा हुआ ‘धोखे’ का सवाल
सऊदी से दोस्ती का इस्तेमाल पाकिस्तान ने अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए किया. क्योंकि सऊदी अरब लंबे समय से पाकिस्तान का महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार रहा है. पाकिस्तान के आर्थिक संकट के दौर में रियाद की मदद और निवेश की भूमिका भी रही है. ऐसे में बीच जंग में पाकिस्तान का सऊदी का साथ छोड़ना कहीं ना कहीं दोनों देशों के संबंधों पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है.
पाकिस्तान के मौजूदा रुख को उसके रणनीतिक हितों से जोड़कर भी देखा जा सकता है. ईरान उसका पड़ोसी है और हूतियों के ईरान के साथ संबंध हैं. सीधे सैन्य संघर्ष में उतरने से पाकिस्तान को क्षेत्रीय तनाव का सामना करना पड़ सकता है. जो कि पाकिस्तान बिल्कुल भी नहीं चाहता.
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सऊदी को पाकिस्तान ने दोस्ती का भरोसा दिया और रक्षा साझेदारी की, और इसी को लेकर अरबों डॉलर वसूल लिये. लेकिन जब हूतियों के हमले हुए तो पाकिस्तान सैन्य जवाब के बजाय बातचीत का संदेश दे रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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