Pakistan Struggles TTP and IMF: दुनिया की भू-राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर है जहां एक तरफ महाशक्ति रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन संभावित हमलों की आशंका से सतर्क हैं, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी देश पाकिस्तान अपने ही घर के भीतर छिपे दुश्मनों और चरमराते आर्थिक हालातों के कारण ‘दुबकने’ को मजबूर है. एक ओर जहाँ पुतिन अपनी ऊर्जा पाइपलाइनों को बचाने के लिए अभेद्य सुरक्षा घेरा बना रहे हैं, वहीं पाकिस्तान में आतंकी सरेआम आत्मघाती हमलों को अंजाम दे रहे हैं और देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए उसे बार-बार विदेशी मदद के आगे झोली फैलानी पड़ रही है.
रूस-यूक्रेन युद्ध अब समुद्र की गहराइयों तक पहुंच गया है. राष्ट्रपति पुतिन ने आशंका जताई है कि ब्लैक सी (काला सागर) के नीचे बिछी रूस की गैस और तेल पाइपलाइनों को निशाना बनाया जा सकता है. पुतिन ने परिवहन बुनियादी ढांचे और एनर्जी लाइनों पर ‘एंटी-टेररिस्ट’ सुरक्षा को कई गुना बढ़ाने का आदेश दिया है. यह वही समुद्री मार्ग है जहां से भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा (कच्चा तेल) होकर गुजरता है. अगर यहां हमला होता है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं.
जहां पुतिन बाहरी खतरों से सुरक्षा की प्लानिंग कर रहे हैं, वहीं पाकिस्तान अपने ही घर में ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) के कहर से कांप रहा है. पंजाब प्रांत के भक्कर में खैबर पख्तूनख्वा सीमा पर स्थित ‘दज्जाल चेकपोस्ट’ को एक आत्मघाती हमलावर ने निशाना बनाया. इस हमले में 5 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए. प्रतिबंधित टीटीपी ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जो दर्शाता है कि पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और वह अपने ही घर में आतंकियों से घिर गया है.
सुरक्षा के मोर्चे पर विफल पाकिस्तान आर्थिक मोर्चे पर भी पूरी तरह पस्त है. अपनी अर्थव्यवस्था को वेंटिलेटर से उतारने के लिए वह एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सामने घुटनों पर है. 25 फरवरी से आईएमएफ की टीम इस्लामाबाद के दौरे पर है. यह टीम विस्तारित कोष सुविधा (EFF) के तहत आर्थिक सुधारों की कठोर समीक्षा करेगी.
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एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का निवेश-से-जीडीपी अनुपात गिरकर 13.8 प्रतिशत रह गया है. यह आंकड़ा बांग्लादेश (22.4%) के मुकाबले काफी कम है, जिससे पाकिस्तान एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम निवेश करने वाला देश बन गया है.
पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति उसकी लाचारी और विफलता का प्रमाण है. एक तरफ सीमावर्ती इलाकों में पुलिसकर्मियों के जनाजे उठ रहे हैं और दूसरी तरफ IMF की टीम आर्थिक नीतियां तय कर रही है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा कर पाएगा, या वह इसी तरह वैश्विक मंच पर ‘दुबक कर’ रहने को मजबूर रहेगा.
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