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पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा महत्वपूर्ण, इंडिया-डच रिलेशंस को मिलेगी नई दिशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित नीदरलैंड यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है. यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि नीदरलैंड में नई सरकार बनने और प्रधानमंत्री रॉब येहतुन के कार्यभार संभालने के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी.

नीदरलैंड में भारत के राजदूत कुमार तुहिन ने इस यात्रा को लेकर कई अहम बातें साझा की हैं, जिससे साफ है कि यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है.

राजदूत तुहिन के मुताबिक, दोनों नेता अब तक भारत-नीदरलैंड संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और आगे की दिशा तय करेंगे. खासतौर पर नई तकनीक, सेमीकंडक्टर सेक्टर और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर रहेगा. माना जा रहा है कि यह मुलाकात दोनों देशों के बीच साझेदारी को एक नई रणनीतिक ऊंचाई दे सकती है.

इसके अलावा व्यापार और निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, समुद्री सहयोग और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से बातचीत होने की उम्मीद है.

व्यापार और निवेश में पहले से मजबूत रिश्ते

नीदरलैंड पहले से ही भारत के सबसे अहम व्यापारिक साझेदारों में शामिल है और इसे यूरोप का एक प्रमुख प्रवेश द्वार भी माना जाता है. बड़ी संख्या में भारतीय कंपनियां वहां काम कर रही हैं, वहीं कई डच कंपनियां भारत में निवेश और कारोबार कर रही हैं. राजदूत ने कहा कि भविष्य में यह साझेदारी और मजबूत होने की पूरी संभावना है, खासकर तब जब भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता लागू हो जाएगा.

ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है. नीदरलैंड में कई बड़ी वैश्विक ऊर्जा कंपनियां मौजूद हैं, जो भारत के साथ पहले से ही काम कर रही हैं. वहीं प्रधानमंत्री मोदी की ‘मिशन लाइफ’ और स्वच्छ ऊर्जा पर भारत की नीति इस साझेदारी को और मजबूती दे रही है.

दोनों देशों की खासियत भी एक-दूसरे को पूरक बनाती है. नीदरलैंड के पास उन्नत तकनीक और विशेषज्ञता है, जबकि भारत के पास विशाल बाजार और तेजी से बढ़ती क्षमता.

शिक्षा, स्वास्थ्य और नवाचार में बढ़ते कदम

शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है. पिछले साल भारत के छह आईआईटी संस्थानों ने नीदरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ट्वेंते और आइंडहोवन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के साथ समझौते किए थे. स्वास्थ्य क्षेत्र में भी फार्मा सहयोग, शोध और तकनीकी साझेदारी के कई नए रास्ते खुल रहे हैं.

नीदरलैंड में भारतीय मूल के लोग वहां की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. वे दोनों देशों के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक और मानवीय सेतु की तरह काम कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें: रूस के विदेश मंत्री लावरोव ने पीएम मोदी से की मुलाकात, वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर हुई बात

भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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