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क्या है Ring Of Fire? क्यों इस क्षेत्र को कहा जाता है भूकंप-सुनामी जोन?

Ring Of Fire: आज रूस के कैमचटका में 8.8 रिक्टर स्केल तीव्रता का भूकंप आया है. जिसकी वजह से पूरे प्रशांत महासागर के इलाके में मौजूद देशों में सुनामी की चेतावनी जारी की गई है. जापान के तटीय इलाकों में 4 फीट तक ऊंची लहरें देखी गई. वहीं हवाई में 6 फीट तक लहरे उपर उठती दिखी. आपने एक बात जरूर नोट की होगी कि अधिकतर सुनामी और भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं. आखिर ऐसा है क्यों? इसका जवाब वहां के भूगोल में छिपा है. आइये बताते हैं.

पहले भूगोल समझते हैं

रूस के सबसे उत्तरी हिस्से को साइबेरिया कहते हैं. यह इलाका साइबेरियन टुंड्रा से घिरा हुआ है. वहीं अलास्का अमेरिका का सबसे उत्तर में मौजूद राज्य है. जो उत्तरी अमेरिका के सबसे ऊपरी हिस्से पर पश्चिम की तरफ पड़ता है.

साइबेरिया का इलाका

ये दोनों इलाके पूरी तरह से बर्फीले पहाड़, जंगल और झरने से घिरे हुए हैं. ये इलाके दुनिया के सबसे खूबसूरत इलाकों में गिने जाते हैं. इन दोनों के बीच आर्कटिक महासागर और बेरिंग सागर फैला हुआ है. यह पूरा इलाका प्रशांत महासागर के सबसे उत्तरी किनारे पर आता है.

अलास्का का इलाका

वहीं दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट से शुरू होकर एशिया के पूर्वी तट तक और दक्षिण पूर्व एशिया से शुरू होकर अलास्का तक एक घोड़े की नाल जैसा इलाका बनाता है. इस पूरे इलाके का कुल क्षेत्रफल करीब 40 हजार वर्ग किमी है और इसी एरिया में दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप और सुनामी आते हैं. इसे रिंग ऑफ फायर कहते हैं.

क्या है रिंग ऑफ फायर?

उपर बताया गया पूरा क्षेत्र प्रशांत महासागर को चारों तरफ एक घेरा बनाता है. जिसके उत्तर में साइबेरिया और अलास्का आते हैं, तो दक्षिण में इंडोनेशिया और फिलीपींस देश आते हैं. वहीं पूर्वी हिस्से की बात करें तो अमेरिका का हवाई द्वीप और थोड़ा बहुत मेक्सिको का क्षेत्र आता है. वहीं इसके पश्चिमी तट पर पड़ता है जापान. इस पूरे इलाके में दुनिया के 90 फीसदी भूकंप आते हैं. दुनिया के 75% एक्टिव ज्वालामुखी इसी जोन में हैं और धरती के अंदर टेक्टोनिक प्लेट्स और सबडक्शन के सबसे ज्यादा मामले यहीं आते हैं. जिसकी वजह से इस एरिया को ‘रिंग ऑफ फायर’ कहते हैं.

रिंग ऑफ फायर

टेक्टोनिक प्लेट्स हैं सबसे ज्यादा जिम्मेदार

हमें धरती उपर से गोल दिखती है, लेकिन अंदर से यह उतनी ही टूटी हुई है. धरती की सतह कई टुकड़ों से मिलकर बनी हुई है. जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहते हैं. जब धरती के कोर में कोई हलचल होती है तो ये टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं, हिलती हैं या खिसकती हैं. साइबेरिया से लेकर अलास्का तक का इलाका पैसिफिक प्लेट और नॉर्थ अमेरिकन प्लेट्स से मिलकर बना है. ये प्लेट्स हर साल कुछ सेंटीमीटर एक दूसरे से दूर खिसकती हैं. टेक्टोनिक प्लेट्स के अंदर थोड़ी सी भी हलचल इस पूरे इलाके को इफेक्ट करती है.

टेक्टोनिक प्लेट दो तरह से इस इलाके को प्रभावित करती है.

सबडक्शन : जब पैसिफिक प्लेट नॉर्थ अमेरिकन प्लेट के नीचे धंसती है तो उसे सबडक्शन कहते हैं. इस दौरान जब दोनों प्लेट टकराती हैं तो भारी दबाव पैदा होता है. जब ये दबाव बहुत ज्यादा होता है तो टेक्टोनिक प्लेट्स टूटने या खिसकने लगती है. जिससे भूकंप आता है. इसलिये ये इलाका इतना संवेदनशील है. यहां ऐसी गतिविधियां लगातार होती रहती हैं.

वैज्ञानिक रिसर्च क्या कहते हैं?

इस क्षेत्र को लेकर कई रिसर्च किये गए हैं. जिसमें इस इलाके को लेकर कुछ खास बातें पता चली हैं.

टेक्टोनिक प्लेट्स में हलचल: वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया है कि इस इलाके में टेक्टोनिक प्लेटों में बहुत तेज गतिविधियां होती हैं. जिसकी वजह से इस इलाके में सबसे ज्यादा भूकंप और ज्वालामुखियों का निर्माण हुआ है.

ज्वालामुखी: टेक्टोनिक प्लेट्स टूटने की वजह से धरती के अंदर मौजूद लावा को बाहर निकलने का मौका मिल जाता है. जिसकी वजह से यहां सबसे ज्यादा ज्वालामुखी हैं. जैसे माउंट रेडाउट और माउंट स्पर. ये दोनों ज्वालामुखी इन्हीं टेक्टोनिक प्लेट्स का नतीजा हैं.

अलास्का में भूकंप का हाल: अमेरिका का अलास्का इलाका रिंग ऑफ फायर के उत्तरी छोर पर पड़ता है. जहां सबसे ज्यादा भूकंप आते हैं. बताया जाता है कि यहां हर साल 10 हजार से ज्यादा भूकंप आते हैं. हालांकि इसमें अधिकतर हल्के होते हैं.

डेंर जोन में आता है साइबेरिया: रूस का साइबेरिया इलाका भूकंप के लिहाज से डेंजर जोन में आता है. साइबेरिया के पूर्वी इलाके की धरती के नीचे हमेशा हलचल होती है. जिसकी वजह से यहां भूकंप आते हैं.

वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद ये प्लेटें वैसे हर साल 2 से 5 सेंटीमीटर की रफ्तार से खिसकती हैं. वैसे तो इतनी कम रफ्तार से कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन जब ये रफ्तार ज्यादा हो जाती है तो ये बड़े भूकंप को जन्म देती हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार इस क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेट्स में फॉल्ट लाइन्स सबसे ज्यादा हैं. जिसकी वजह से ये समय-समय पर सुनामी और भूकंप को जन्म देती हैं.

– भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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