दुनिया

भगवान शिव के मंदिरों को लेकर क्यों लड़ रहे हैं थाईलैंड और कंबोडिया? क्या है इन मंदिरों का इतिहास?

Thailand Cambodia Temple Conflict: कंबोडिया और थाईलैंड के बीच संघर्ष चरम पर है. दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे पर जमकर गोलीबारी कर रही हैं. हाल ही में थाईलैंड ने कंबोडिया पर F-16 विमानों से हमला किया. जिसमें कुल 12 लोगों के मारे जाने की खबर है. दोनों देशों ने एक दूसरे के यहां से अपने राजनयिकों को बुला लिया है. हालात ऐसे बन गए हैं कि कभी भी युद्ध की घोषणा की जा सकती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस विवाद के केंद्र में एक शिव मंदिर है. जिसको लेकर दोनों देशों में ठन गई है. क्या है इस शिव मंदिर का इतिहास और क्यों दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे के खून की प्यासी हो गई हैं.

थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर भगवान शिव को समर्पित 900 साल पुराना एक हिंदू मंदिर है. जिसे प्रीह विहियर मंदिर समूह के नाम से जानते हैं. इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में खमेर साम्राज्य के राजाओं के द्वारा कराया गया. यह एक मंदिर नहीं बल्कि कई मंदिरों का समूह है. जिसमें भगवान राम के पूरे जीवन को दर्शाती हुई मूर्तियां बनी हुई हैं. इसके अलावा इसमें भगवान हनुमान की भी मूर्तियां लगी हुई हैं.

ता मुएन थॉम मंदिर को लेकर तनाव

कंबोडिया के डांगरेक पहाड़ों में 527 मीटर ऊंची चट्टान पर स्थित ता मुएन थॉम मंदिर थाईलैंड और कंबोडिया दोनों के लिए एक धार्मिक स्थल है. जिसपर कब्जे को लेकर थाईलैंड और कंबोडिया के बीच तनाव है.

गुरुवार को एक बार फिर सीमा पर झड़पें हुई. जिसमें 12 लोग मारे गए. बताया जा रहा है कि यह एक दशक से भी ज्यादा समय में सबसे हिंसक झड़प थी. इस झड़प में कई लोगों के घायल होने की सूचना मिली है.

गुरुवार को इसलिए शुरू हुई लड़ाई

गुरुवार को थाईलैंड के सुरिन प्रांत में ता मुएन थॉम मंदिर के पास गोलीबारी उस समय शुरू हुई जब कंबोडियाई सैनिकों के द्वारा थाई सैन्य ठिकानों के पास हवाई टोही ड्रोन तैनात किये गए. जब थाई सैनिकों ने तनाव कम करने के लिए बातचीत करने की कोशिश की तो कंबोडियाई सैनिकों की तरफ से भयंकर गोलीबारी शुरू कर दी गई.

एक तरफ जहां थाईलैंड ने आत्मरक्षा में कार्रवाई करने की बात कही है. तो वहीं कंबोडिया ने थाईलैंड पर संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.

थाईलैंड ने खतरे के स्तर को लेवल 4 तक बढ़ाया

वहीं सीमा पर तनाव को देखते हुए थाईलैंड ने खतरे के स्तर को लेवल 4 तक बढ़ा दिया है. जिसकी वजह से सीमा पर मौजूद सभी चौकियां बंद कर दी गई हैं. सेनाओं को हाई अलर्ट पर कर दिया गया है. थाईलैंड ने अतिरिक्त सुरक्षा बरतते हुए सीमा पर मौजूद 86 गांवों से लगभग 40 हजार थाई नागरिकों को हटा दिया है.

अब समझते हैं कि आखिर मामला क्या है?

इस विवाद को समझने के लिए हमें आज से 600 साल पीछे जाना होगा. जब थाईलैंड को स्याम देश (थाईलैंड) नाम से जाना जाता था. इस समय थाईलैंड और कंबोडिया सहित पूरे आसपास के इलाकों पर खमेर साम्राज्य शासन करता था. तब खामेर राजाओं ने इस पूरे इलाके में कई खूबसूरत मंदिरों का निर्माण कराया था. इसमें अंगकोरवाट मंदिर और प्रीह विहियर मंदिर भी शामिल है. चूंकि खमेर राजा हिंदू धर्म को मानने वाले थे. इसलिए ये मंदिर हिंदू मंदिर के रूप में निर्मित किए गए.

1431 में जब खमेर साम्राज्य का अंत शुरू हुआ तब पड़ोसी देश स्याम देश (थाईलैंड) की सेनाओं ने कंबोडिया की राजधानी पर जबरदस्त हमला किया. उस समय कंबोडिया की राजधानी का नाम अंगकोर थॉम था. स्याम देश (थाईलैंड) से हार के बाद खमेर राजा को दक्षिण की तरफ हटना पड़ा. फिर अगले 400 सालों तक स्याम देश (थाईलैंड) ने पूरे कंबोडियाई क्षेत्र को अपने प्रभाव में ले लिया. 1794 में खमेर सम्राट ने आधुनिक सिसोफोन और बटदाम्बैंग के आसपास के क्षेत्र स्याम देश (थाईलैंड) को सौंप दिया. इन्हीं क्षेत्रों में प्रीह विहियर मंदिर भी मौजूद है. जिसको लेकर दोनों देश लड़ रहे हैं.

फ्रांस की एंट्री ने उलझाया मामला

18वीं शताब्दी में कंबोडिया फ्रांस का उपनिवेश बन गया. तब कंबोडिया के राजा नोरोडोम ने कंबोडिया को फ्रांसीसी संरक्षित राज्य का दर्जा देने की मांग की. कंबोडिया के राजा ने ये मांग स्याम देश (थाईलैंड) के चंगुल से बाहर निकलने के लिए किया. मामला बिगड़ते देख स्याम देश (थाईलैंड) ने खमेर साम्राज्य के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया और पूरे कंबोडिया पर अपना आधिपत्य का दावा छोड़ दिया. 1907 में फ्रांस ने एक मैप तैयार किया जिसमें उसने पूपार प्रीह विहियर का क्षेत्र कंबोडिया को दिखा दिया. जबकि जमीन पर कंबोडिया और थाईलैंड के बीच जल विभाजन सीमा थी.

द्वितीय विश्व युद्ध में थाईलैंड ने पलट दी बाजी

1941 में थाईलैंड ने जापान के साथ गठबंधन करके प्रीह विहियर और अन्य क्षेत्रों पर दोबारा कब्जा कर लिया. जिसका कंबोडिया ने विरोध किया और इसे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में चैलेंज किया. 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इसे 9-3 के बहुमत से इन क्षेत्रों को कंबोडिया को दे दिया.

1963 में कंबोडिया के राजकुमार सिहानोक ने इस मंदिर को लेकर एक निर्णय लिया. जिसमें उसने बताया कि इस मंदिर में थाई लोग बिना विजा के आ-जा सकेंगे. हालांकि उस समय इस क्षेत्र में भारी मात्रा में बारूदी सुरंगे बनी हुई थीं. जिसकी वजह से ऐसा संभव नहीं हो पाया. इलाके में ढेर सारे गुट गुरिल्ला लड़ाई लड़ रहे थे.

2008 में एक बार फिर भड़क उठा विवाद

2008 में एक बार फिर यह विवाद उभर कर सामने आ गया. दरअसल कंबोडिया ने इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता देने के लिए आवेदन किया. जिसपर थाई सरकार ने आपत्ति दर्ज करा दी. थाई सरकार का कहना था कि मंदिर के आसपास का क्षेत्र उनका है.

जब यूनेस्को ने इस प्रीह विहियर मंदिर को संरक्षित सूचि में डाल दिया. तो थाईलैंड ने इसका जमकर विरोध किया. इसी बात को लेकर 2008 से लेकर 2011 तक दोनों देशों के सेनाओं के बीच कई बार झड़पें हो चुकी हैं. ताजा संघर्ष इसी विवाद का नतीजा है.

– भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

Recent Posts

अर्णव तूफान के चलते झारखंड के 7 जिलों में भारी बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’, जानें कब मिलेगा छुटकारा?

चक्रवात 'अर्णव' के चलते झारखंड के 7 पश्चिमी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश…

8 minutes ago

EPFO Update: क्या सुरक्षित रहेगी कर्मचारियों की मेहनत की कमाई? EPFO के इस नए प्रस्ताव से मची हलचल

EPFO News: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने सदस्यों की बचत का एक हिस्सा अब…

16 minutes ago

योगी अकेले मैदान में, संगठन कहां खड़ा है?

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती योगी…

20 minutes ago

‘ये कैसे भाई-बहन… नीयत ठीक नहीं’, लव गिल-स्काउट विवाद पर गौहर खान का रिएक्शन

Bigg Boss 20: लव गिल और स्काउट की नजदीकियों पर विवाद के बीच गौहर खान…

29 minutes ago

यूपी भाजपा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर उत्साहित, 2027 विधानसभा चुनाव के लिए बनेगा रोडमैप

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी…

41 minutes ago

किराया 625 और मांगा 1479…विरोध करने पर ड्राइवर ने की महिला से बदसलूकी और दी धमकी

गुरुग्राम में ऐप पर ₹625 किराया होने के बावजूद महिला से ₹1479 वसूलने और विरोध…

43 minutes ago