संयुक्त राज्य अमेरिका के इतिहास में सोमवार का दिन एक ऐसे भूचाल के रूप में दर्ज हो गया है, जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को महा-शक्तिशाली बना दिया है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शक्तियों का दायरा इतना बढ़ा दिया है कि अब उनके फैसले ही वहां ‘ब्रह्मा की लकीर’ बन चुके हैं.
दरअसल सुप्रीम कोर्ट के इस नए फैसले के बाद अब राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका की किसी भी स्वतंत्र फेडरल एजेंसी के चीफ को जब चाहें, बिना कोई कारण बताए, सिर्फ एक झटके में पद से सस्पेंड या बर्खास्त कर सकते हैं. कोर्ट ने इसके लिए 91 साल पुराने उस ऐतिहासिक कानून को भी जड़ से उखाड़ फेंका है जो राष्ट्रपति के इन अधिकारों पर लगाम लगाता था. आइए जानते हैं ट्रंप के इस नए ब्रह्मास्त्र की पूरी इनसाइड स्टोरी.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की बेंच में से छह कंजर्वेटिव जजों ने बहुमत से यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साल 1935 के अपने ही एक बेहद मशहूर और ऐतिहासिक फैसले ‘हम्फ्रीज एक्जीक्यूटर बनाम यूनाइटेड स्टेट्स’ को पूरी तरह से पलट दिया है. पुराने कानून के तहत अमेरिका में स्वतंत्र एजेंसियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखने के लिए राष्ट्रपति को उनके प्रमुखों को हटाने से रोका जाता था.
अगर राष्ट्रपति किसी को हटाना भी चाहता था, तो उसे ठोस कानूनी वजह बतानी पड़ती थी. लेकिन चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में साफ कहा है कि राष्ट्रपति को अधिकारियों को हटाने से रोकने वाली पुरानी व्यवस्था पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है.
इस नए फैसले का सीधा मतलब यह है कि अब डोनाल्ड ट्रंप को फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC), नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड, मेरिट सिस्टम्स प्रोटेक्शन बोर्ड और कंज्यूमर प्रोडक्ट सेफ्टी कमीशन जैसी शक्तिशाली एजेंसियों के प्रमुखों को हटाने के लिए किसी ठोस वजह की जरूरत नहीं होगी.
अगर किसी अधिकारी का काम या उसकी विचारधारा ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं से मेल नहीं खाती है, तो ट्रंप उसे तुरंत बर्खास्त कर सकते हैं. आपको बता दें कि ट्रंप ने फेडरल ट्रेड कमीशन की पूर्व सदस्य रेबेका स्लॉटर को बिना कोई कारण बताए निकाल दिया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अब ट्रंप के फैसले को बिल्कुल सही और संवैधानिक ठहरा दिया है.
सेंट्रल बैंक को मिली बड़ी राहत: सुप्रीम कोर्ट ने इस महा-शक्तिशाली फैसले में अमेरिका के केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व को पूरी तरह से अलग रखा है. कोर्ट ने देश की आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए माना कि सेंट्रल बैंक को राजनीतिक दखलंदाजी से दूर रखना जरूरी है.
लिसा कुक की कुर्सी सुरक्षित: इसी वजह से फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक फिलहाल अपने पद पर बनी रहेंगी. डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर मॉर्गेज फ्रॉड के गंभीर आरोप लगाकर हटाने की कोशिश की थी, जिसके खिलाफ लिसा कुक कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं. कोर्ट ने ट्रंप के इस एक्शन पर प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए फिलहाल रोक लगा दी है.
सुप्रीम कोर्ट से इतनी बड़ी और ऐतिहासिक जीत मिलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुशी का ठिकाना नहीं है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए अमेरिकी न्यायपालिका का आभार जताया है. ट्रंप ने लिखा कि एक मौजूदा राष्ट्रपति होने के नाते यह उनके लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है कि उन्हें ऐसा अभूतपूर्व फैसला मिला है. ट्रंप के अनुसार यह अमेरिकी इतिहास में प्रेसिडेंशियल पावर्स यानी राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर दिया गया अब तक का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण फैसला है, जो देश को आगे ले जाने में मदद करेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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