पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली ऐतिहासिक शांति वार्ता से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने कड़े तेवर(Trump Warn Iran) दिखा दिए हैं. गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने ईरान को सख्त हिदायत दी कि वह होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों से ‘फीस’ वसूलना तुरंत बंद करे.
बता दें कि ट्रंप का यह बयान उन रिपोर्ट्स के बाद आया है जिनमें दावा किया गया था कि ईरान इस जलमार्ग से गुजरने वाले टैंकरों से ‘ट्रांजिट टोल’ वसूलने की योजना बना रहा है. ट्रंप ने साफ कर दिया कि अमेरिकी समझौता किसी भी तरह की वसूली की इजाजत नहीं देता.
दरअसल कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा (Trump Warn Iran) किया है. उन्होंने कहा कि दुनिया बहुत जल्द तेल की आपूर्ति शुरू होते देखेगी, चाहे इसमें ईरान शामिल हो या नहीं. हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे ईरान की मदद के बिना इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से तेल की आवाजाही कैसे सुनिश्चित करेंगे.
बता दें कि उनके इस बयान (strait of hormuz news) को तेहरान पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि ईरान ने सीजफायर के दौरान हर दिन केवल 15 जहाजों को गुजरने की अनुमति देने की बात कही है.
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट ने आग में घी डालने का काम किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के तेल और गैस निर्यातकों के संघ के प्रवक्ता हामिद हुसैनी ने संकेत दिया है कि ईरान जहाजों से ट्रांजिट टोल की मांग कर सकता है और यह भुगतान ‘क्रिप्टोकरेंसी’ में करने की शर्त रखी जा सकती है. ट्रंप ने इस विचार को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ईरान तेल की आवाजाही के मामले में बेहद खराब काम कर रहा है और यह मौजूदा शांति समझौते की भावना के खिलाफ है.
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यह भी बताते चलें कि तल्खी के बावजूद ट्रंप ने बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं. उन्होंने ईरान के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताते हुए इसे दुनिया के लिए एक ‘बड़ा दिन’ बताया. इस पर बोलते हुए ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान अब लंबे संघर्ष से थक चुका है और अपने देश के पुनर्निर्माण पर ध्यान देना चाहता है.
साथ ही उन्होंने यह भी खुलासा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच टैरिफ और प्रतिबंधों में राहत देने जैसे 15 प्रमुख बिंदुओं में से कई पर पहले ही सहमति बन चुकी है. अब सबकी नजरें शुक्रवार को होने वाली ‘इस्लामाबाद वार्ता’ पर टिकी हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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