US Tariff: अमेरिका और भारत के बीच चल रहे तनाव में जल्द ही राहत की खबर आ सकती है. मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंथा नागेश्वरन ने गुरुवार को संकेत दिया कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ में ढील मिल सकती है. खास तौर पर रूस से तेल खरीदने पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाने की संभावना जताई जा रही है. यही नहीं, रेसिप्रोकल टैरिफ को भी मौजूदा स्तर से घटाकर 10–15% तक लाया जा सकता है.
कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंथा नागेश्वरन ने कहा कि ‘उन्हें भरोसा है कि अगले दो महीनों के भीतर इस विवाद का हल निकल जाएगा. उनके मुताबिक, ‘कम से कम 25% अतिरिक्त टैरिफ का मसला आने वाले कुछ हफ्तों में सुलझ जाएगा.’
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अब तेजी पकड़ रही है. इससे करीब 50 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर पड़ रहा दबाव कम हो सकता है.
दरअसल, अमेरिका ने पहले ही भारत पर 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया हुआ था. लेकिन बीते अगस्त में रूस से कच्चे तेल की खरीद को यूक्रेन युद्ध के दौरान पुतिन की आर्थिक मदद मानते हुए ट्रंप प्रशासन ने 25% का अतिरिक्त टैरिफ भी लगा दिया. नतीजतन, भारत पर कुल टैरिफ दर बढ़कर 50% तक पहुंच गई. इसके बाद भारत, ब्राजील के साथ उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया जिन पर अमेरिकी टैरिफ का सबसे ज्यादा बोझ पड़ा. नागेश्वरन ने अपने संबोधन में कहा कि दोनों देशों की सरकारें सतही मतभेदों से आगे बढ़कर गहरे स्तर पर बातचीत कर रही हैं और कई मुद्दों पर समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं.
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील लंबे समय से अटकी हुई है. मुख्य अड़चन कृषि और डेयरी उत्पादों को लेकर रही है. ट्रंप द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ के बाद यह बातचीत ठंडी पड़ गई थी. लेकिन हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर प्रधानमंत्री मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताते हुए डील को आगे बढ़ाने का संकेत दिया. इसी कड़ी में इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी वार्ताकार ब्रेंडेन लिंच नई दिल्ली पहुंचे और भारत के मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल के साथ करीब सात घंटे लंबी बैठक की. सूत्रों के मुताबिक, यह चर्चा काफी सकारात्मक रही.
मौजूदा हालात में भारत का करीब 55% निर्यात अमेरिकी टैरिफ के दायरे में आता है. सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टर्स में कपड़ा, रसायन, मरीन फूड, जेम्स एंड ज्वेलरी और मशीनरी शामिल हैं. ये क्षेत्र भारत की श्रम-प्रधान निर्यात अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं. टैरिफ का असर साफ दिखने भी लगा है. अगस्त में अमेरिका को भारत का निर्यात घटकर सिर्फ 6.87 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले 10 महीनों का सबसे निचला स्तर है.
-भारत एक्सप्रेस
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