दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (सीएलएटी) पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) परीक्षा के अंकों को आधार बनाकर वकीलों की भर्ती करने के भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के कदम पर रोक लगा दी. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने भी इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.
अदालत ने कहा कि इस मामले में उसके फैसले सुनाए जाने तक भर्ती प्रक्रिया पर रोक रहेगी. उसने कहा कि ऐसे परीक्षा अंकों का उपयोग रोजगार के लिए कैसे किया जा सकता है, जबकि यह उच्च शिक्षा के लिए छात्रों की योग्यता का आंकलन करना है. उसने यह टिप्पणी एक वकील शन्नू बघेल की याचिका पर सुनवाई करते हुए की.
उन्होंने एनएचएआई की 11 अगस्त की अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसमें क्लैट 2022 और स्नातकोत्तर विधि प्रवेश परीक्षा के अंकों के आधार पर 44 वकीलों की नियुक्ति की बात कही गई थी.
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