आज दुनिया डिजिटल युग में कदम रख चुकी है, लेकिन कुछ समुदाय अभी भी अपनी प्राचीन परंपराओं को थामे हुए हैं. आज हम आपको ऐसी आदिवासी जनजाति के बारे में बताएंगे, जहां नहाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. हम बात कर रहे हैं हिम्बा जनजाति की, जो नामीबिया में रहती है और आज भी पाषाण युग जैसा जीवन जीती है. इस जनजाति के नियम-कानून आज भी प्राचीन हैं.
हिम्बा जनजाति में करीब 50 हजार लोग हैं, जो पुरानी परंपराओं का सख्ती से पालन करते हैं. हैरानी की बात है कि इस जनजाति में नहाना सख्त मना है. इसके बजाय, वे पानी की जगह धुएं से स्नान करते हैं, जिसे ‘स्मोक बाथिंग’ कहते हैं. इसके अलावा, इस जनजाति की एक और अनोखी प्रथा है, जो बाहरी मेहमानों से जुड़ी है.
हिम्बा जनजाति में मेहमानों का स्वागत खाने-पीने के साथ-साथ घर की महिलाओं को ‘परोसने’ के साथ किया जाता है. इसके लिए विशेष कमरा होता है, और यह फैसला पुरुष लेते हैं. खुद महिला का पति अपनी पत्नी को इस काम के लिए भेजता है. इस जनजाति में महिलाओं की कोई अपनी इच्छा या अधिकार नहीं है, और सभी निर्णय पुरुषों के हाथ में होते हैं. यह प्रथा और नियम सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे.
ये भी पढ़ें: खाटू श्याम मंदिर में महिला से वॉशरूम यूज के लिए वसूले 805 रुपये, सोशल मीडिया पर हंगामा
-भारत एक्सप्रेस
दिल्ली हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण की प्रक्रिया तेज करने के…
रामनाथ गोयनका भारतीय पत्रकारिता के उन चुनिंदा नामों में हैं, जिन्होंने प्रेस की आजादी को…
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार नीरज कुमार ने अपना नामांकन…
मणिपुर यौन हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और CBI को पीड़ित गवाहों…
भारत के लोकतंत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त का पद हमेशा से विशेष महत्व रखता रहा…
PM मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की एफआईआर रद्द करने…